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इंटरनेट अभिव्यक्ति की आजादी...स्वागत योग्य

इंटरनेट अभिव्यक्ति की आजादी...स्वागत योग्य अनीष   व्यास   स्वतंत्र   पत्रकार सुप्रीम कोर्ट ने  इंटरनेट  के इस्तेमाल को संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत अभिव्यक्ति के अधिकार का ही एक रूप करार दिया है। शुक्रवार को यह अहम फैसला देते हुए उसने जम्मू-कश्मीर प्रशासन को इस केंद्र शासित प्रदेश में सभी प्रतिबंध आदेशों की एक हफ्ते के अंदर समीक्षा करने का आदेश दिया। अदालत ने यह भी कहा कि धारा 144 सीआरपीसी (निषेधाज्ञा) का इस्तेमाल अनिश्चित काल तक नहीं किया जा सकता। भविष्य में अगर कहीं धारा 144 लगाई जाती है तो सात दिनों के अंदर उसका रिव्यू जरूर होना चाहिए। लोगों को अधिकार होगा कि वे इसे कोर्ट में चुनौती दें। फैसला भले ही एक क्षेत्र विशेष के संदर्भ में हुआ हो, लेकिन इसका प्रभाव अखिल भारतीय होगा और लंबे समय तक याद किया जाएगा। खासकर अदालत ने जिस तरह इंटरनेट को अभिव्यक्ति की आजादी का एक अंग ठहराया है, वह कई तरह से स्वागत योग्य है। इसलिए भी कि अब प्रशासन का मनमाने ढंग से हर मौके-बेमौके पर इंटरनेट सेवा को बाधित करने का अधिकार खत्म होगा और इसलिए भी कि इससे मूल अधिकारों क...

छह ग्रह के एक साथ वलयाकार सूर्य ग्रहण 26 दिसंबर को होगा

  छह ग्रह के एक साथ वलयाकार सूर्य ग्रहण 26 दिसंबर को होगा अनीष व्यास  वरिष्ठ पत्रकार 26 दिसंबर को होने वाला सूर्यग्रहण इस बार विशेष परिस्थितियों के साथ होगा। इस दौरान सूर्यग्रहण में छह ग्रह एक साथ होंगे और यह भारत में दिखाई भी देगा। वर्ष 1962 में बहुत बड़ा सूर्यग्रहण हुआ था, जिसमें सात ग्रह एक साथ थे। इस बार छह ग्रह एक साथ हैं केवल एक ग्रह की कमी है। 26 दिसंबर को लगभग तीन घंटे सूर्यग्रहण होगा। यह सुबह 8:17 पर शुरू होगा, 9:37 पर ग्रहण का मध्यकाल होगा और 10:57 पर ग्रहण का मोक्ष होगा। सूतक बारह घंटे पहले ही 25 दिसम्बर की रात 8:17 पर लगगेगा। ये सूर्य ग्रहण धनु राशि और मूल नक्षत्र में बनेगा इसलिए व्यक्तिगत रूप से धनु राशि और मूल नक्षत्र में जन्मे लोगों पर इस ग्रहण का विशेष प्रभाव पड़ेगा। ज्योतिष नजरिये से 26 दिसंबर को होने वाले सूर्य ग्रहण का प्रभाव किसी समान्य सूर्य ग्रहण के मुकाबले बहुत ज्यादा तीव्र होगा क्योंकि इस सूर्य ग्रहण के समय धनु राशि में एक साथ छह ग्रह (सूर्य, चन्द्रमा, शनि, बुध, बृहस्पति, केतु) का योग बनेगा जिससे इस सूर्यग्रहण का ...

नए विचारों और योजनाओं को अपनाना चाहिये

नए विचारों और योजनाओं को अपनाना चाहिये  रंजीता  व्यास   लेखिका अपने आसपास कुछ लोगों को आप जुझारु, सनकी या जिद्दी कहते हैं। इसकी वजह होता है उनका एक खास गुण कि उन्हें जो चाहिए, उसे वह हासिल करके ही दम लेते हैं। जिद्दी लोगों को अक्सर लोग कम पसंद करते हैं, मगर यह भी गलत नहीं है कि ऐसे ही लोगों में दुनिया को बदलने का साहस होता है। इस दुनिया में कुछ भी पाना है तो आपको थोड़ा तो जिद्दी बनना पड़ेगा। यह कहानी भी ऐसे ही एक जिद्दी लड़के की है, जिसका नाम था विराट। विराट पिछले कई साल से अपने शहर में होने वाली मैराथन में हिस्सा लेता था, लेकिन कभी रेस पूरी नहीं कर पाता था। इस बार वह बहुत उत्साहित था, क्योंकि वह पिछले कई महीनों से रोज इस रेस की तैयारी कर रहा था। उसे अपने आप पूरा पर भरोसा था कि वह इस साल की मैराथन रेस जरूर पूरी कर लेगा। देखते ही देखते मैराथन का वो दिन भी आ गया और सभी लोग एक जगह एकत्रित हुए और जैसे ही रेस शुरू हुई बाकी लड़को की तरह विराट ने भी दौड़ना शुरू किया। वह जोश और हिम्मत से भरा हुआ था, और बड़े अच्छे ढंग से दौड़ रहा था। लेकिन आधी रेस पूरी करने के बाद व...

भारतीय रेलवे में बदलाव और सुधार की प्रक्रिया स्वागत योग्य

भारतीय रेलवे में बदलाव और सुधार की प्रक्रिया  स्वागत योग्य अनीष व्यास  वरिष्ठ  पत्रकार भारतीय रेलवे में बदलाव और सुधार की प्रक्रिया न केवल स्वागत योग्य है, बल्कि दूसरे क्षेत्रों के लिए अनुकरणीय भी है। सरकारी उपक्रमों में रेलवे देश की सबसे बड़ी कंपनियों में शुमार है और एक साथ सबसे ज्यादा लोगों को रोजगार भी रेलवे के जरिए ही नसीब होता है। अत: रेलवे में किसी भी तरह का सुधार सीधे देश की रोजी-रोटी से जुड़ा मामला है। केंद्र सरकार ने 114 साल पुराने रेलवे बोर्ड के ढांचे को बदलने का फैसला कर लिया है, जो एक तरह से बहुप्रतीक्षित था। भारतीय रेलवे बोर्ड का ढांचा आज तक सामंती मानसिकता वाला रहा है। बोर्ड के जिम्मे काम तो बहुत रहे हैं, लेकिन उसमें जवाबदेही और सेवा गुणवत्ता का जो जरूरी स्तर होना चाहिए, उसका सदा से अभाव रहा है। रेलवे के तहत आने वाली आठ सेवाओं को मिलाकर एक सेवा गठित करना एक ऐसा फैसला है, जिसकी वकालत और चर्चा लंबे समय से होती रही है। विगत 25 वर्षों में पांच से ज्यादा समितियां रेलवे सेवाओं के एकीकरण की सिफारिश कर चुकी हैं। पर इन सिफारिशों को पहले ही क्यों नहीं ...

'नंद के घर आनंद भयो...जय कन्हैया लाल की'...!!

'नंद के घर आनंद भयो...जय कन्हैया लाल की'...!! गली-गली सजेगी श्रीकृष्ण की झांकी...जन्माष्टमी पर माखन चोर आएंगे आपके घर अनीष   व्यास   स्वतंत्र   पत्रकार भारत आस्था का अनूठा संगम है और इसी आस्था पर जीवित है विश्व का सबसे प्राचीनतम धर्म।   भगवान विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण का हिन्दू धर्म में एक अलग स्थान है।   जातक कथाओं और महाभारत के अनुसार मथुरा के कारागार में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म माँ देवकी के गर्भ से उस समय हुआ था जब चारों तरफ पाप , अन्याय और आतंक का प्रकोप था , धर्म जैसे ख़त्म सा हो गया था।   धर्म को पुनः स्थापित करने के लिए ही द्वापर युग में कान्हा का जन्म हुआ था।   आज भी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी इसी उद्देश्य से मनाई जाती है।   भारत के प्रत्येक हिस्से में जन्माष्टमी बड़े ही धूम - धाम से मनाई जाती है | ख़ासकर उत्तर भारत में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी एक विशेष पर्व है।   वृन्दावन की गलियाँ हो या फिर सुदूर गाँव की चौपाल य...