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डायबिटीज...डरे नहीं...स्वस्थ रहें...!!

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डायबिटीज...डरे नहीं...स्वस्थ रहें...!! पूरे विश्व में डायबिटीज का हल्ला चरम पर है। चीख -चीख कर बताया जा रहा है कि डायबिटीज बढ़ रही है । भारत में भी यही स्थिति है । वैज्ञानिक, चिकित्सक, औषधि निर्माण कंपनियां सभी अपना काम कर रही है किंतु डायबिटीज की रोकथाम जागरूकता एवं डायबिटीज शिक्षा के नाम पर कुछ खास नहीं हो रहा है। भारत में तो और भी बुरा हाल है । आज मेरी मुलाकात राजस्थान के वरिष्ठ डायबिटीज विशेषज्ञ, सरल एवं सौम्य व्यवहार के धनी, हमेशा मरीजों की मदद करने वाले एवं बड़े भाई डॉक्टर शैलेश लोढ़ा से हुई । आपको यहां पर जानकारी देना चाहूंगा कि डॉक्टर शैलेश लोढ़ा डियर सोसाइटी के माध्यम से शोध एवं सामाजिक कार्य भी करते हैं ।  मेडिकल कैंप के माध्यम से डायबिटीज के बारे में लोगों को जानकारी देते हैं। बातचीत के दौरान मैंने डॉक्टर शैलेश लोढ़ा से निवेदन किया कि डायबिटीज के बारे में आप मुझे अधिक जानकारी दें।उन्होंने मुझे अपनी पुस्तक डायबिटीज डरे नहीं, स्वस्थ रहें भेंट की ,यह पुस्तक डायबिटीज रोगियों के लिए बहुत उपयोगी है । मैं आपको जानकारी देना चाहूंगा की स्वास्थ्य संबंधी अनेक पुस्तकें प्र...

आखिर बन ही गया रेडियो जॉकी

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आखिर बन ही गया रेडियो जॉकी...!! पत्रकारिता की एक और पायदान आज पूरी की...!! सोचा भी न था कि एक दिन रेडियो जॉकी बन पाऊंगा। लेकिन अपने सपने को पूरा करने के लिए मेहनत से मुंह नहीं मोड़ा। कोशिश पर कोशिश करता रहा। आखिर आज वह मंजिल मिल ही गई। रेडियो सैल्फी 90.8 FM पर मौका मिला RJ बनने का। मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन के साथ ही जोधपुर में पत्रकारिता का सफर आरंभ हुआ। दैनिक भास्कर, दैनिक नवज्योति और राजस्थान पत्रिका का सफर तय किया। फिर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में ETV राजस्थान  में अजमेर ब्यूरो प्रमुख के पद पर रहते हुए जयपुर और हैदराबाद डेक्स पर कार्य किया। एक बार फिर प्रिंट मीडिया में राजस्थान पत्रिका जयपुर में मैनेजर सर्कुलेशन इवेंट के पद पर कार्य आरंभ किया। लेकिन आज रेडियो जॉकी बनकर मीडिया की एक और पायदान पार कर ली। इस उपलब्धि का श्रेय मैं अपने परिवार को देना चाहता हूं। मेरी पत्नी रंजीता व्यास एवं दोनों बेटे यश व्यास, श्रेयांश व्यास जिन्होंने हर कदम पर मेरा हौसला बढ़ाया और साथ दिया। उनके प्यार और विश्वास के कारण यह संभव हो सका। मेरी मां अनसूया व्यास और पिता स्वर्गीय राजेंद्...

सिंजारा यानि धमोली की धमाल

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पूरे देश में जहां पर भी राजस्थानी निवास करते हैं वहां पर आज सिंजारा यानि धमोली की धमाल की तैयारियां जोरों पर चल रही है। महिलाएं विशेष रूप से आज घरों में पकवान बनाती है जिस में अधिकतर पूरी, गट्टे की सब्जी,आलू की सब्जी और कबूली (नमकीन चावल) और बाजार से मिठाई नमकीन मंगाई जाती है । कुछ शहरों में धमोली की धमाल मचाने के लिए पकवानों की अस्थायी तौर पर दुकानें लगती है । आज दोपहर के बाद से रातभर और अलसुबह सूर्य उदय से पहले धमोली की जाती है. इसमें भोर सुबह में सूर्योदय से पहले भांति भांति की मिठाई, फल और पकवानों आदि का नाश्ता किया जाता है। अलसुबह इन पकवानों का आनंद लेने के बाद अच्छी तरह से कुल्ला करके एक बार पुनः सोने की परम्परा है। कल, बड़ी तीज यानी सातुड़ी तीज हैं। महिलाओं द्वारा इस दिन पूरे दिन सिर्फ पानी पीकर उपवास किया जाता है. शाम को तलाई पूजा करने के बाद चंद्रदेव के दर्शन के बाद सत्तू, ऋतुफल और फैदड आदि परोसकर व्रत खोलती हैं। फिर तीज के दिन तीजणियां सुबह नहा धोकर मंदिरों में दर्शन के लिए जाती है. महिलाये सोलह बार झूला झूलती है ।उसके बाद ही पानी पीती है। जोधपुर शहर से शुरू हुई यह ...