धनतेरस पर मां लक्ष्मी का पूजन घर मे लाता है ऐश्वर्य सौभाग्य वैभव...!!.!!
धनतेरस पर मां लक्ष्मी का पूजन घर मे लाता है ऐश्वर्य सौभाग्य वैभव...!!
औषधियों
के जनक भगवान धनवंतरी की जयंती यानी धनतेरस का पर्व इस बार सोमवार 5 नवंबर को
मनाया जाएगा। कहा जाता है कि समु्द्र मंथन के दौरान भगवान धनवंतरी और मां लक्ष्मी का
जन्म हुआ था, यही वजह है कि धनतेरस को भगवान धनवंतरी और मां लक्ष्मी की पूजा की जाती
है । भारतीय कैलेंडर के अनुसार कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को
धन की देवी के उत्सव का प्रारंभ होने के कारण इस दिन को धनतेरस के नाम से जाना जाता
है। धनतेरस को धन त्रयोदशी व धन्वन्तरी त्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है।धनतेरस
दिवाली के दो दिन पहले मनाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि समुद्र मंथन के समय कलश के
साथ माता लक्ष्मी का अवतरण हुआ उसी के प्रतीक के रूप में ऐश्वर्य वृद्धि, सौभाग्य वृद्धि
के लिए बर्तन खरीदने की परम्परा शुरू हुई। माना जाता है कि इस दिन कोई नया सामान
खरीदने से आपका धन 13 गुना बढ़ जाता है।
भारतीय
संस्कृति में स्वास्थ्य का स्थान धन से ऊपर माना जाता रहा है। यह कहावत आज भी प्रचलित
है कि 'पहला सुख निरोगी काया, दूजा सुख घर में माया' इसलिए दीपावली में सबसे पहले धनतेरस
को महत्व दिया जाता है। जो भारतीय संस्कृति के हिसाब से बिल्कुल अनुकूल है। समस्त
भारत भूखंड के प्रत्येक कोने में दीपावली के दो दिन पूर्व हम समस्त भारतवासी धनतेरस पर्व को किसी न किसी रूप में मनाते हैं। यह महापर्व कार्तिक
कृष्ण त्रयोदशी के दिन भारत में ही नहीं अपितु सारे विश्व में वैद्य समाज द्वारा भगवान
धन्वंतरि की पूजा-अर्चना कर उनके प्रति कृतज्ञता प्रकट कर मनाया जाता है तथा उनसे यह
प्रार्थना की जाती है कि वे समस्त विश्व को निरोग कर समग्र मानव समाज को रोग विहीन
कर उन्हें दीर्घायुष्य प्रदान करें।
धनत्रयोदशी
के दिन सायंकाल यमराज के निमित्त दीपदान करें। इसे 'यम दीपदान' कहा जाता है। घर के
मुख्य द्वार के बाहर गोबर का लेपन करें तत्पश्चात मिट्टी के 2 दीयों में तेल डालकर
प्रज्वलित करें। दीये प्रज्वलित करते समय 'दीपज्योति नमोस्तुते' मंत्र का जाप करते
रहें एवं अपना मुख दक्षिण दिशा की ओर रखें। धनत्रयोदशी के दिन 'यम दीपदान' करने से
घर-परिवार में किसी सदस्य की अकाल मृत्यु नहीं होती है।
प्राचीन कथा
प्राचीन
कथाओं के अनुसार धनतेरस का उत्सव राजा हिमा के सोलह वर्षीय पुत्र की कहानी
को दर्शाता है। भविष्यवाणी की गई थी कि वह अपने विवाह के चौथे दिन सांप के
काटने से मर गए थे।हालाँकि उनकी शादी को
चार दिन
ही हुए थे, लेकिन उनकी नई विवाहित
पत्नी,इस भविष्यवाणी के बारे में पहले से जानती थी इसलिए
उसने अपने पति के शयन कक्ष के प्रवेश द्वार पर एक ढेर में सोने और चांदी की बहुमूल्य
धातुओं के बने सिक्कों के साथ अपने सारे गहने बाहर रखे और पुरी जगह को दीपों से भर
दिया फिर, रात भर उन्होंने कई बार कहानियां
सुनाईं और अपने पति की नींद को दूर
करने के लिए गाने भी गाये। माना जाता है कि जब यम, मृत्यु के देवता, एक साँप के रूप
धारण करके आये, तो उन्होंने खुद को राजकुमार के कक्ष में प्रवेश करने में असमर्थ पाया
क्योंकि वह तेजोमय चमक-दमक और झिलमिलाते दीपकों, गहनों की रोशनी के सौंदर्य से चकित
हो गए, और इसलिए वह गहने और सिक्कों के ढेर पर चढ़ गए और उनकी पत्नी के मधुर गीतों
को सुनने लगे। सुबह होते ही, वह चुपचाप राजकुमार के जीवन को बख्श कर दूर चले गये। इस
तरह, युवा पत्नी ने अपने पति को मौत से बचा लिया। इसलिए, यह दिन ‘यमदीपदान’ के नाम
से भी जाना जाता है।
एक
और लोकप्रिय कहानी भी इस त्योहार से जुड़ी हुई है। ऐसा माना जाता है कि देवताओं और
राक्षसों के बीच जो महाद्वीपीय लड़ाई हुई तो उस लड़ाई के दौरान कई रत्न निकले समुद्र
मंथन के अंत में भगवान धनवंतरि (भगवान के चिकित्सक
और विष्णु के अवतार) अमृत कलश लेकर प्रकट हुए, जिन्होंने
अमृत के लिए समुद्र को मंथन किया था।
धनतेरस का महत्व
धनतेरस का महत्व
1.
इस दिन नए उपहार, सिक्का, बर्तन व गहनों की खरीदारी करना शुभ माना जाता है। शुभ मुहूर्त
में पूजन करने के साथ सात धान्यों की पूजा की जाती है. सात धान्य में गेहूं, उडद, मूंग,
चना, जौ, चावल और मसूर शामिल होता है।
2. धनतेरस के दिन चांदी खरीदना शुभ माना जाता है।
3. भगवान धन्वन्तरी की पूजा से स्वास्थ्य और सेहत मिलता है। इस दिन ही दीपावली की रात
लक्ष्मी गणेश की पूजा हेतु मूर्ति भी खरीदते हैं।
धनतेरस के दिन क्या करें
1. इस दिन धन्वंतरि का पूजन करें।
2. नवीन झाडू एवं सूपड़ा खरीदकर उनका पूजन करे।
3. सायंकाल दीपक प्रज्वलित कर घर, दुकान आदि को श्रृंगारित करें।
4. मंदिर, गोशाला, नदी के घाट, कुओं, तालाब, बगीचों में भी दीपक लगाएं।
5. यथाशक्ति तांबे, पीतल, चांदी के गृह-उपयोगी नवीन बर्तन और जेवर खरीदना चाहिए।
6. हल जुती मिट्टी को दूध में भिगोकर उसमें सेमर की शाखा डालकर तीन बार अपने शरीर पर
फेरें।
7. कार्तिक स्नान करके प्रदोष काल में घाट, गौशाला, बावड़ी, कुआँ, मंदिर आदि स्थानों
पर तीन दिन तक दीपक जलाएं।
धनतेरस पर खरीदे ये सामान
दिवाली
से पहले धनतेरस पर पूजा का विशेष महत्व होता है. इस दिन धन और आरोग्य के लिए भगवान
धन्वंतरि और कुबेर की पूजा की जाती है. इस साल धनतेरस 5 नंवबर को मनाया जाएगा. वहीं
धनतेरस के दिन कुछ खास सामान को खरीदने का भी काफी महत्व माना जाता है. मान्यता है
कि धनतेरस के दिन कुछ खास चीजों को खरीदना काफी शुभ रहता है. इन शुभ चीजों को खरीदने
से घर परिवार में सुख शांती बनी रहती है और धन लाभ भी होता है. आइए जानते हैं ऐसी ही
विशेष चीजों के बारे में जिन्हें धनतेरस के दिन खरीदा जाना चाहिए।
सोना-चांदी
धनतेरस
के दिन धातु की खरीद को काफी अहम माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन धातु को खरीदने
से भाग्य अच्छा बनता है. परंपरा है कि धनतेरस के दिन सोना, चांदी जरूर खरीदना चाहिए.
इस दिन बजट के मुताबिक सोना, चांदी के सिक्के, गहने, मूर्ति जैसी चीजों की खरीद की
जा सकती है।
कुबेर यंत्र
धनतेरस
पर कुबेर यंत्र खरीदना भी शुभ माना जाता है. इसे अपने घर, दुकान के गल्ले या तिजोरी
में स्थापित करना चाहिए. इसके बाद 108 बार 'ऊँ यक्षाय कुबेराय वैश्रववाय, धन-धान्यधिपतये
धन-धान्य समृद्धि मम देहि दापय स्वाहा' मंत्र का जप करना चाहिए. इस मंत्र से धन की
कमी का संकट दूर होता है।
श्री
कुबेर मंत्र:
ॐ श्रीं ह्रीं दरिद्र विनाशनि धनधान्य समृद्धि देहि,
देहि कुबरे शंख विध्ये नमः ।।
तांबा
धनतेरस
के दिन तांबे की वस्तुएं या बर्तन लाने का काफी महत्व रहता है. यह सेहत के लिए भी शुभ
माना जाता है. साथ ही कांसा से बनी सजावटी वस्तुएं या बर्तन भी घर लेकर आ सकते हैं।
झाडू
धनतेरस
के दिन झाडू भी खरीदा जाता है. मान्यता है कि इस दिन झाडू खरीदने से गरीबी दूर होती
है. साथ ही नई झाडू से नकारात्मक ऊर्जा दूर जाती है और घर में लक्ष्मी का वास होता
है।
शंख-रूद्राक्ष
धनतेरस
के दिन शंख खरीदने को काफी शुभ माना जाता है. इस दिन शंख खरीदकर उसकी पूजा करें. शास्त्रों
के मुताबिक जिस घर में रोजाना पूजा के वक्त शंख बजाया जाता है, उस घर से मां लक्ष्मी
कभी नहीं जाती. साथ ही घर के संकट भी दूर हो जाते हैं. इसके अलावा सात मुखी रूद्राक्ष
धनतेरस के दिन घर पर लाने से सारे कष्ट दूर होते हैं।
भगवान गणेश और देवी लक्ष्मी
की मूर्ति
धनतेरस
के दिन भगवान गणेश और देवी लक्ष्मी की मूर्ति भी घर में लानी चाहिए. मान्यता है कि
इससे घर में पूरे साल धन और अन्न की कमी नहीं होती है. दोनों देवी देवता धन और बुद्धि
बढ़ाते हैं।
नमक-धनिया
धनतेरस
के दिन नमक जरूर खरीदें. ऐसा माना जाता है कि इस दिन नमक घर में लाने से धन की बढ़ोतरी
होती है और दरिद्रता का नाश होता है. इसके अलावा धनिया भी इस दिन घर में लाना चाहिए.
साबुत धनिया लाने का काफी महत्व है. इसे पूजा के बाद अपने घर के आंगन और गमले में डाल
देना चाहिए।
दान करने का भी विशेष महत्व
धनतेरस
के दिन कई चीजें खरीदी जाती हैं लेकिन इस दिन विशेष तौर पर सोना चांदी खरीदा जाता है।
पुराणों में बताया गया है कि धनतेरस के दिन केवल खरीदने का ही नहीं बल्कि दान करने
का भी विशेष महत्व है। कहा जाता है कि इस दिन किया दान आपको बाद में कई गुना ज्यादा
लाभ देता है।
1. अन्न का
दान
अगर स्वास्थ्य की समस्या हो तो अन्न जैसे गेंहू, चावल का दान करना उत्तम रहता
है। इसके साथ ही पानी का दान करना भी शुभ रहता है। इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि दान
ऐसे व्यक्ति को करें जो वास्तव में जरूरतमंद हो।
2. पीले वस्त्र
का दान
धनतेरस के दिन आप किसी गरीब व्यक्ति को नए पीले वस्त्र दान कर सकते हैं। धनतेरस
के दिन वस्त्र का दान महादान कहा जाता है।
3. नारियल
व मिठाई का दान
धनतेरस के दिन आपको किसी जरूरतमंद व्यक्ति को नारियल और मिठाई का दान देना चाहिए।
ऐसा करने से आपको पैसों कीतंगी का सामना नहीं करना होगा।
4. लोहा दान
धनतेरस के दिन लोहा दान करने से आपका दुर्भाग्य चला जाता है आपको शुभ फल की प्राप्ति
होती है।
5. सुहाग
का सामान दान
जिन कुंवारी कन्याओं की शादी नहीं हो रही है उन्हें जल्दी शादी के लिए सुहाग
का सामान दान करना चाहिए। इससे विवाह शीघ्र हो जाता है।
दिनों दिन बढ़ता जाए आपका कारोबार,
परिवार में बना रहे स्नेह व प्यार
आप पर होती रहे सदा धन की बौछार
ऐसा हो आपका धनतेरस का त्यौहार
सादर / साभार
अनीष व्यास
Comments
Post a Comment