दीपावली की रात घर आएंगी मां लक्ष्मी...करें स्वागत !!
भारत के त्योहारों
में दीपावली काफी विशिष्ट स्थान रखती है। इस त्योहार के अवसर पर घरों और दूकानों को
सजाया-संवारा जाता है। उनकी साफ-सफाई की जाती है। इस दिन धन की देवी लक्ष्मी की पूजा
विशेष रुप से की जाती है। हिन्दू धर्म के अनुसार दीपावली के दिन धन की देवी महालक्ष्मी
के साथ विघ्न-विनाशक श्री गणेश की देवी मातेश्वरी सरस्वती देवी की भी पूजा-आराधना की
जाती है। कहा जाता है कि कार्तिक मास की अमावस्या की आधी रात में देवी लक्ष्मी धरती
पर आती हैं और हर घर में जाती हैं। जिस घर में स्वच्छता और शुद्धता होती है वह वहां
निवास करती हैं। दीपावली हिंदुओं का प्रमुख त्योहार है। हर देशवासी को इस त्यौहार का
इंतजार रहता है। यह रोशनी और प्रकाश का त्यौहार है। इस दिन बच्चों को खाने के लिए तरह
तरह की मिठाइयां मिलती हैं और पटाखे चलाने को मिलते हैं। दीपावली के दिन गणेश लक्ष्मी
की पूजा की जाती है। यह त्यौहार अंधकार पर प्रकाश की विजय को दिखाता है। इस दिन घरों
में दिए जलाए जाते हैं। विभिन्न प्रकार की लाइटें, रंग बिरंगी रोशनी लगाई जाती हैं।
लोग नए वस्त्र पहनते हैं। शाम को मिठाइयां बांटी जाती हैं, लोग दावतों में जाते हैं।
दीपावली भारत में मनाए
जाने वाले प्रमुख त्योहारों में से एक है। इस त्यौहार को सिख, बौद्ध और जैन धर्म के
लोग मनाते हैं। सिख समुदाय इसे बंदी छोड़ दिवस के रूप में मनाता है। दीपावली के दिन
ही भगवान श्रीराम 14 वर्ष का वनवास काटकर अयोध्या वापस लौटे थे। श्रीराम का स्वागत
सत्कार करने के लिए अयोध्या के निवासियों ने घी के दीपक जलाए थे।
उस दिन कार्तिक महीने
की अमावस्या थी। घने अंधकार में प्रकाश करने के लिए अयोध्या वासियों ने दिए जलाए थे।
तब से यह दिन हर साल सभी भारतीय प्रकाश पर्व (दीपावली) के रूप में मनाते हैं। यह त्यौहार
दिखाता है कि बुराई पर सदैव अच्छाई की जीत होती है, सत्य की जीत सदैव होती है। यह त्यौहार
कार्तिक मास की अमावस्या के दिन मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्री राम सीता माता के
साथ 14 वर्षों का वनवास काटकर अयोध्या लौटे थे। उसी खुशी में यह त्यौहार मनाया जाता
है। इस दिन पांडव 12 वर्षों का वनवास काटकर घर लौटे थे। हिंदी कैलेंडर के अनुसार नया
वर्ष दीपावली के दिन शुरू होता है। यह त्यौहार बुराई पर अच्छाई, अंधकार पर प्रकाश और
अज्ञान पर ज्ञान की विजय को दिखाता है।
5 दिनों का है ये
त्योहार
दीपावली तीनों पर्वों का मिश्रण है, ये हैं- धनतेरस, नरक चतुर्दशी और महालक्ष्मी पूजन. नरक चतुर्दशी को छोटी दीवाली भी कहा जाता है. दीपावली की शुरूआत धनतेरस से होती है, जो कार्तिक मास की अमावस्या के दिन पूरे चरम पर आती है।कार्तिक मास की अमावस्या की रात को घरों और दुकानों में दीपक, मोमबत्तियां और बल्ब लगाए और जलाए जाते हैं।
दीपावली तीनों पर्वों का मिश्रण है, ये हैं- धनतेरस, नरक चतुर्दशी और महालक्ष्मी पूजन. नरक चतुर्दशी को छोटी दीवाली भी कहा जाता है. दीपावली की शुरूआत धनतेरस से होती है, जो कार्तिक मास की अमावस्या के दिन पूरे चरम पर आती है।कार्तिक मास की अमावस्या की रात को घरों और दुकानों में दीपक, मोमबत्तियां और बल्ब लगाए और जलाए जाते हैं।
दीपावली का महत्व
14 वर्ष के वनवास के बाद भगवान राम अपनी पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटने का प्रतीक है दीवाली. अपने पिता राजा दशरथ के आदेश के बाद भगवान राम 'वनवास' के लिए गए थे। इस दौरान उन्होंने भारत के जंगलों और गांवों में 14 साल बिताए. अपने वनवास के अंत में दस मुखी लंका के राजा रावण ने सीता का अपहरण कर लिया था।इसके बाद भगवान राम ने रावण से युद्ध किया और रावण को मारकर अपनी पत्नी को लेकर वापिस अयोध्या लौटे. महाकाव्य रामायण में भगवान राम की जीत बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।
14 वर्ष के वनवास के बाद भगवान राम अपनी पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटने का प्रतीक है दीवाली. अपने पिता राजा दशरथ के आदेश के बाद भगवान राम 'वनवास' के लिए गए थे। इस दौरान उन्होंने भारत के जंगलों और गांवों में 14 साल बिताए. अपने वनवास के अंत में दस मुखी लंका के राजा रावण ने सीता का अपहरण कर लिया था।इसके बाद भगवान राम ने रावण से युद्ध किया और रावण को मारकर अपनी पत्नी को लेकर वापिस अयोध्या लौटे. महाकाव्य रामायण में भगवान राम की जीत बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।
दीपावली का त्योहार
आते ही घर में एक अलग सा माहौल नजर आने लगता है. जहां एक तरफ पूरे घर को सजाया जाता
है, वहीं भगवान गणेश और लक्ष्मी जी की पूजा की तैयारियां भी शुरू हो जाती हैं. कहा
जाता है कि इस दिन मां लक्ष्मी घर में वास करती हैं. अगर दीवाली में मां लक्ष्मी को
खुश कर लिया तो घर में कभी भी धन की समस्या नहीं होती. लेकिन इसी दिन भगवान गणेश को
भी पूजा जाता है. बुद्धि और विवेक के प्रतीक माने जाने वाले गणेश को इस दिन मां लक्ष्मी
के साथ क्यों पूजा जाता है इसके बारे में काफी कम लोग जानते हैं. लेकिन हमारे देश में
हर त्योहार और उसे मनाने के तरीके के पीछे एक कहानी छिपी होती है. दीवाली पर गणेश और
लक्ष्मी की पूजा के पीछे भी एक ऐसी कहानी है।
कहानी
ग्रंथों के मुताबिक एक बार एक वैरागी साधु को राजसुख भोगने की इच्छा जागृत हुई, इसके लिए उसने मां लक्ष्मी की आराधना शुरू की. उसकी कड़ी तपस्या और आराधना से लक्ष्मी जी प्रसन्न हुईं और उसे दर्शन देकर वरदान दिया कि उसे उच्च पद और सम्मान प्राप्त होगा। इसके बाद वह साधु राज दरबार में पहुंचा. वरदान मिलने से उसे अभिमान हो गया था. उसने भरे दरबार में राजा को धक्का मारा जिससे राजा का मुकुट नीचे गिर गया. राजा व उसके साथी उसे मारने के लिए दौड़े. लेकिन इसी बीच राजा के गिरे हुए मुकुट से एक कालानाग निकल कर बाहर आया. सभी चौंक गए और साधु को चमत्कारी समझकर उसकी जय जयकार करने लगे. राजा ने इस बात से प्रसन्न होकर साधु को अपना मंत्री बना दिया. उस साधु को रहने के लिए अलग से महल भी दे दिया गया. राजा को एक दिन वह साधु भरे दरबार से हाथ खींचकर बाहर ले गया. यह देख दरबारी जन भी पीछे भागे. सभी के बाहर जाते ही भूकंप आया और भवन खण्डहर में तब्दील हो गया. लोगों को लगा कि साधु ने सबकी जान बचाई. इसके बाद साधु का मान-सम्मान और भी ज्यादा बढ़ गया. अब इस वैरागी साधु में अहंकार और भी ज्यादा बढ़ गया।
ग्रंथों के मुताबिक एक बार एक वैरागी साधु को राजसुख भोगने की इच्छा जागृत हुई, इसके लिए उसने मां लक्ष्मी की आराधना शुरू की. उसकी कड़ी तपस्या और आराधना से लक्ष्मी जी प्रसन्न हुईं और उसे दर्शन देकर वरदान दिया कि उसे उच्च पद और सम्मान प्राप्त होगा। इसके बाद वह साधु राज दरबार में पहुंचा. वरदान मिलने से उसे अभिमान हो गया था. उसने भरे दरबार में राजा को धक्का मारा जिससे राजा का मुकुट नीचे गिर गया. राजा व उसके साथी उसे मारने के लिए दौड़े. लेकिन इसी बीच राजा के गिरे हुए मुकुट से एक कालानाग निकल कर बाहर आया. सभी चौंक गए और साधु को चमत्कारी समझकर उसकी जय जयकार करने लगे. राजा ने इस बात से प्रसन्न होकर साधु को अपना मंत्री बना दिया. उस साधु को रहने के लिए अलग से महल भी दे दिया गया. राजा को एक दिन वह साधु भरे दरबार से हाथ खींचकर बाहर ले गया. यह देख दरबारी जन भी पीछे भागे. सभी के बाहर जाते ही भूकंप आया और भवन खण्डहर में तब्दील हो गया. लोगों को लगा कि साधु ने सबकी जान बचाई. इसके बाद साधु का मान-सम्मान और भी ज्यादा बढ़ गया. अब इस वैरागी साधु में अहंकार और भी ज्यादा बढ़ गया।
हटवा दी गणेश की
प्रतिमा
राजा के महल में एक गणेश जी की प्रतिमा थी. एक दिन साधु ने यह कहकर वह प्रतिमा हटवा दी कि यह देखने में बिल्कुल अच्छी नहीं है. कहा जाता है कि साधु के इस कार्य से गणेश जी रुष्ठ हो गए. उसी दिन से उस मंत्री बने साधु की बुद्धि भ्रष्ट होना शुरू हो गई और वह ऐसे काम करने लगा जो लोगों की नजरों में काफी बुरे थे. इसे देखते हुए राजा ने उस साधु से नाराज होकर उसे कारागार में डाल दिया. साधु जेल में एक बार फिर से लक्ष्मी जी की आराधना करने लगा. लक्ष्मी जी ने दर्शन देकर उससे कहा कि तुमने भगवान गणेश का अपमान किया है. इसके लिए गणेश जी की आराधना करके उन्हें प्रसन्न करो. इसके बाद वह साधु गणेश जी की आराधना करने लगा. उसकी इस आराधना से गणेश जी का क्रोध शान्त हो गया. एक रात गणेश जी ने राजा के स्वप्न में आकर कहा कि साधु को फिर से मंत्री बनाया जाए. राजा ने आदेश का पालन करते हुए साधु को मंत्री पद दे दिया. इस घटना के बाद से मां लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा एक साथ होने लगी।
बिना बुद्धि के धन नहीं
गणेश भगवान को बुद्धि और सिद्धि का प्रतीक माना जाता है. इसीलिए कहा जाता है कि मां लक्ष्मी के घर आने के बाद अगर बुद्धि का उपयोग नहीं किया जाए तो लक्ष्मी जी को रोक पाना मुश्किल हो जाता है. इसीलिए दीवाली की शाम को मां लक्ष्मी के साथ-साथ गणेश जी की प्रतिमा रखकर दोनों की साथ में पूजा की जाती है. इस दीवाली आप भी भगवान गणेश और मां लक्ष्मी जी की विधिवत पूजा करके अपने घर में धन, बुद्धि और यश का वास करवा सकते हैं।
राजा के महल में एक गणेश जी की प्रतिमा थी. एक दिन साधु ने यह कहकर वह प्रतिमा हटवा दी कि यह देखने में बिल्कुल अच्छी नहीं है. कहा जाता है कि साधु के इस कार्य से गणेश जी रुष्ठ हो गए. उसी दिन से उस मंत्री बने साधु की बुद्धि भ्रष्ट होना शुरू हो गई और वह ऐसे काम करने लगा जो लोगों की नजरों में काफी बुरे थे. इसे देखते हुए राजा ने उस साधु से नाराज होकर उसे कारागार में डाल दिया. साधु जेल में एक बार फिर से लक्ष्मी जी की आराधना करने लगा. लक्ष्मी जी ने दर्शन देकर उससे कहा कि तुमने भगवान गणेश का अपमान किया है. इसके लिए गणेश जी की आराधना करके उन्हें प्रसन्न करो. इसके बाद वह साधु गणेश जी की आराधना करने लगा. उसकी इस आराधना से गणेश जी का क्रोध शान्त हो गया. एक रात गणेश जी ने राजा के स्वप्न में आकर कहा कि साधु को फिर से मंत्री बनाया जाए. राजा ने आदेश का पालन करते हुए साधु को मंत्री पद दे दिया. इस घटना के बाद से मां लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा एक साथ होने लगी।
बिना बुद्धि के धन नहीं
गणेश भगवान को बुद्धि और सिद्धि का प्रतीक माना जाता है. इसीलिए कहा जाता है कि मां लक्ष्मी के घर आने के बाद अगर बुद्धि का उपयोग नहीं किया जाए तो लक्ष्मी जी को रोक पाना मुश्किल हो जाता है. इसीलिए दीवाली की शाम को मां लक्ष्मी के साथ-साथ गणेश जी की प्रतिमा रखकर दोनों की साथ में पूजा की जाती है. इस दीवाली आप भी भगवान गणेश और मां लक्ष्मी जी की विधिवत पूजा करके अपने घर में धन, बुद्धि और यश का वास करवा सकते हैं।
इन मंत्रों से करें
मां को प्रसन्न
यह मां लक्ष्मी के अलग-अलग नाम हैं, जिनका जप करने से मां प्रसन्न होती है।
ॐ आद्यलक्ष्म्यै नम:, ॐ विद्यालक्ष्म्यै नम:, ॐ सौभाग्यलक्ष्म्यै नम:, ॐ अमृतलक्ष्म्यै नम:, ॐ कामलक्ष्म्यै नम:, ॐ सत्यलक्ष्म्यै नम:,
ॐ भोगलक्ष्म्यै नम:, ॐ योगलक्ष्म्यै नम:.
ऊं अपवित्र: पवित्रोवा सर्वावस्थां गतो पिवा ।
य: स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तर:।।
यह मां लक्ष्मी के अलग-अलग नाम हैं, जिनका जप करने से मां प्रसन्न होती है।
ॐ आद्यलक्ष्म्यै नम:, ॐ विद्यालक्ष्म्यै नम:, ॐ सौभाग्यलक्ष्म्यै नम:, ॐ अमृतलक्ष्म्यै नम:, ॐ कामलक्ष्म्यै नम:, ॐ सत्यलक्ष्म्यै नम:,
ॐ भोगलक्ष्म्यै नम:, ॐ योगलक्ष्म्यै नम:.
ऊं अपवित्र: पवित्रोवा सर्वावस्थां गतो पिवा ।
य: स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तर:।।
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं
कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः
पूजा सामग्री
दीपावली के शुभ अवसर पर मां लक्ष्मी की पूजा में कलावा, अक्षत, लाल वस्त्र, फूल, पांच सुपारी, रोली, सिंदूर, एक नारियल, अक्षत, लाल वस्त्र, फूल, पांच सुपारी, लौंग, पान के पत्ते, घी, कलश, कलश के लिए आम का पल्लव, चौकी, समिधा, हवन कुण्ड, हवन सामग्री, कमल गट्टे, पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल), फल, बताशे, मिठाईयां, पूजा में बैठने हेतु आसन, हल्दी , अगरबत्ती, कुमकुम, इत्र, दीपक, रूई, आरती की थाली, कुशा, रक्त चंदनद, श्रीखंड चंदन पूजन सामग्री का इस्तेमाल करें।
पूजा सामग्री
दीपावली के शुभ अवसर पर मां लक्ष्मी की पूजा में कलावा, अक्षत, लाल वस्त्र, फूल, पांच सुपारी, रोली, सिंदूर, एक नारियल, अक्षत, लाल वस्त्र, फूल, पांच सुपारी, लौंग, पान के पत्ते, घी, कलश, कलश के लिए आम का पल्लव, चौकी, समिधा, हवन कुण्ड, हवन सामग्री, कमल गट्टे, पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल), फल, बताशे, मिठाईयां, पूजा में बैठने हेतु आसन, हल्दी , अगरबत्ती, कुमकुम, इत्र, दीपक, रूई, आरती की थाली, कुशा, रक्त चंदनद, श्रीखंड चंदन पूजन सामग्री का इस्तेमाल करें।
पूजा की विधि
पूजन शुरू करने से पहले चौकी को अच्छी तरह से धोकर उसके ऊपर खूबसूरत सी रंगोली बनाएं, इसके बाद इस चौकी के चारों तरफ दीपक जलाएं. मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करने से पहले थोड़े से चावल रख लें।मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए उनके बाईं ओर भगवान विष्णु की प्रतिमा को भी स्थापित करें. अगर आप किसी पंडित को बुलाकर पूजन करवा सकते हैं तो यह काफी अच्छा रहेगा। लेकिन आप अगर खुद मां लक्ष्मी का पूजन करना चाहते हैं तो सबसे पहले पुष्प, फल, सुपारी, पान, चांदी का सिक्का, नारियल, मिठाई, मेवा, सभी सामग्री थोड़ी-थोड़ी मात्रा में लेकर इस त्योहार के पूजन के लिए संकल्प लें।सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा करें और इसके बाद आपने चौकी पर जिस भगवान को स्थापित किया है उनकी. इसके बाद कलश की स्थापना करें और मां लक्ष्मी का ध्यान करें. मां लक्ष्मी को इस दिन लाल वस्त्र जरूर पहनाएं. इससे मां काफी प्रसन्न होंगी और इस दीवाली आपके घर में भी खुशियों का बसेरा होगा।
पूजन शुरू करने से पहले चौकी को अच्छी तरह से धोकर उसके ऊपर खूबसूरत सी रंगोली बनाएं, इसके बाद इस चौकी के चारों तरफ दीपक जलाएं. मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करने से पहले थोड़े से चावल रख लें।मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए उनके बाईं ओर भगवान विष्णु की प्रतिमा को भी स्थापित करें. अगर आप किसी पंडित को बुलाकर पूजन करवा सकते हैं तो यह काफी अच्छा रहेगा। लेकिन आप अगर खुद मां लक्ष्मी का पूजन करना चाहते हैं तो सबसे पहले पुष्प, फल, सुपारी, पान, चांदी का सिक्का, नारियल, मिठाई, मेवा, सभी सामग्री थोड़ी-थोड़ी मात्रा में लेकर इस त्योहार के पूजन के लिए संकल्प लें।सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा करें और इसके बाद आपने चौकी पर जिस भगवान को स्थापित किया है उनकी. इसके बाद कलश की स्थापना करें और मां लक्ष्मी का ध्यान करें. मां लक्ष्मी को इस दिन लाल वस्त्र जरूर पहनाएं. इससे मां काफी प्रसन्न होंगी और इस दीवाली आपके घर में भी खुशियों का बसेरा होगा।
दीपावली के शुभ दिन महालक्ष्मी की पूजा
का विधान है। इस पूजा के साथ ही घर और पूजा घर को सजाने के लिए मंगल वस्तुओं का उपयोग
किया जाता है। आइए जानते हैं कि गृह सुंदरता, समृद्धि और दीपावली पूजन के कौन-से 8 शुभ प्रतीक हैं।
दीपक
दीपक : दीपावली के पूजन में दीपक की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। सिर्फ मिट्टी के दीपक का ही महत्व है। इसमें पांच तत्व हैं मिट्टी, आकाश, जल, अग्नि और वायु। अतः प्रत्येक हिंदू अनुष्ठान में पंचतत्वों की उपस्थिति अनिवार्य होती है। कुछ लोग पारंपरिक दीपक की रोशनी को छोड़कर लाइट के दीपक या मोमबत्ती लगाते हैं जो कि उचित नहीं है।
रंगोली
रंगोली : उत्सव-पर्व तथा अनेकानेक मांगलिक अवसरों पर रंगोली या मांडने से घर-आंगन को खूबसूरती के साथ सजाया जाता है। यह सजावट ही समृद्धि के द्वार खोलती है। घर को साफ सुथरा करके आंगन व घर के बीच में और द्वार के सामने और रंगोली बनाई जाती है।
कौड़ी
कौड़ी : पीली कौड़ी को देवी लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। दीवापली के दिन चांदी और तांबे के सिक्के के साथ ही कौड़ी का पूजन भी महत्वपूर्ण माना गया है। पूजन के बाद एक-एक पीली कौड़ी को अलग-अलग लाल कपड़े में बांधकर घर में स्थित तिजोरी और जेब में रखने से धन समृद्धि बढ़ती है।
तांबे का सिक्का
तांबे का सिक्का : तांबे में सात्विक लहरें उत्पन्न करने की क्षमता अन्य धातुओं की अपेक्षा अधिक होती है। कलश में उठती हुई लहरें वातावरण में प्रवेश कर जाती हैं। यदि कलश में तांबे के पैसे डालते हैं, तो इससे घर में शांति और समृद्धि के द्वार खुलेंगे। देखने में ये उपाय छोटे से जरूर लगते हैं लेकिन इनका असर जबरदस्त होता है।
मंगल कलश
मंगल कलश : भूमि पर कुंकू से अष्टदल कमल की आकृति बनाकर उस पर कलश रखा जाता है। एक कांस्य, ताम्र, रजत या स्वर्ण कलश में जल भरकर उसमें कुछ आम के पत्ते डालकर उसके मुख पर नारियल रखा होता है। कलश पर कुंकूम, स्वस्तिक का चिह्न बनाकर, उसके गले पर मौली (नाड़ा) बांधी जाती है।
श्रीयंत्र
श्रीयंत्र : धन और वैभव का प्रतीक लक्ष्मीजी का श्रीयंत्र। यह सर्वाधिक लोकप्रिय प्राचीन यंत्र है। श्रीयंत्र धनागम के लिए जरूरी है। श्रीयंत्र यश और धन की देवी लक्ष्मी को आकर्षित करने वाला शक्तिशाली यंत्र है। दीपावली के दिन इसकी पूजा होना चाहिए।
फूल
कमल और गेंदे के फूल : कमल और गेंदे के पुष्प को शांति, समृद्धि और मुक्ति का प्रतीक माना गया है। सभी देवी-देवताओं की पूजा के अलावा घर की सजावट के लिए भी गेंदे के फूल की आवश्यकता लगती है। घर की सुंदरता, शांति और समृद्धि के लिए यह बेहद जरूरी है।
नैवेद्य
नैवेद्य और मीठे पकवान : लक्ष्मीजी को नैवद्य में फल, मिठाई, मेवा और पेठे के अलावा धानी, बताशे, चिरौंजी, शक्करपारे, गुझिया आदि का भोग लगाया जाता है। नैवेद्य और मीठे पकवान हमारे जीवन में मिठास या मधुरता घोलते हैं।
दीपावली पूजन मुहूर्त
इस दिन पूरा दिन ही
शुभ माना जाता है. इस दिन किसी भी समय पूजन कर सकते हैं लेकिन प्रदोष काल से लेकर निशाकाल
तक समय शुभ होता है. जो इस दिन बही बसना पूजन करने हैं उनको ही राहु काल का विचार करना
चाहिए, जो लोग सिर्फ गणेश लक्ष्मी जी का पूजन करें उनको विचार नहीं करना चाहिए, क्योंकि
अमावस्या तिथि पर राहु काल का दोष नहीं होता.
अमावस्या तिथि प्रारंभ-
6 नवम्बर 2018 रात 10:03 बजे, अमावस्या तिथि समाप्त- 7 नवम्बर 2018 रात 9:32 बजे,
मुहूर्त समय
प्रातः 8 बजे से
9:30 बजे तक प्रातः 10:30 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक दोपहर 1:30 बजे से सायंकाल 6 बजे
तक सायंकाल 7:30 बजे से रात्रि 12:15 बजे तक
दीपावली अन्य देशो मे मनाते हैं
दीप पर्व अब
केवल हिंदू या
हिंदुस्तान तक ही
सीमित नहीं है
बल्कि दुनिया के
कई हिस्सों में
दीप पर्व अपनी
छटा बिखेरता है।
दुनिया में कई
ऐसे देश हैं
जहां रौशनी का
जलसा देखते ही
बनता है। आज
हम आपको बता
रहे हैं कुछ
खास देशों के
बारे में जहां
दीपोत्सव अलग-अलग
ढंग से मनाया
जाता है। श्रीलंका,
म्यामांर, थाईलैंड, मलेशिया, सिंगापुर,
इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, फिजी, मॉरीशस,
केन्या, तंजानिया, दक्षिण अफ्रीका,
गुयाना, सूरीनाम, त्रिनिदाद और
टोबैगो, नीदरलैंड्स, कनाडा, ब्रिटेन
और अमेरिका में
दीपावली धूमधाम से मनाई
जाती है। कई
देशों में दिवाली
की तरह ही
फायर फेस्टिवल मनाया
जाता है जो
कि अलग-अलग
नाम से मशहूर
हैं, इन्हें मनाने के
पीछे भी मान्यताएं
हैं। भारत के बाहर दिवाली का सबसे बड़ा
सेलिब्रेशन अगर कहीं होता है तो वह है ब्रिटेन के जंगलों से घिरे खूबसूरत शहर लेस्टर
में। वहां रहने वाला हिंदू , जैन और सिख समुदाय तो दिवाली धूमधाम से मनाता ही
है, साथ में दूसरे धर्म के लोग भी इसे व्यापक रूप से मनाते हैं। यहां दिवाली के दिन
लोग पार्कों में और स्ट्रीट पर समूह में एकत्र होकर पटाखे छोड़ते हैं। इसके अलावा वहां
लोग इस दौरान मिठाई भी अपने रिश्तेदारों में बांटते हैं।दीवाली की ही तरह जापान में
भी ओनियो फेयर फेस्टिवल खूब धूम-धाम से मनाया जाता है। बता दें कि जनवरी में आने वाला
ओनियो फेस्टिवल जापान का सबसे पुराना फेस्टिवल है। यहां फुकुओका में दिवाली जैसा
प्रकाशमयी त्योहार धूमधाम से मनता है। इस दौरान छह मशाल जलाई जाती हैं जो कि आपदा को
खत्म करने के प्रतीक के रूप में होती है। इसमें आग की बत्ती को मंदिर से निकाल कर दूसरे
जगह तक ले जाया जाता है। जापानी खास तरह के सफेद कपड़े पहनकर टॉर्च को घुमाते हैं।
आग से हैरतअंगेज करतब दिखाना इस फेस्टिवल को शुभ बनाता है।सिंगापुर में दिवाली फेस्टिवल
के लिए स्पेशल बसों पर रंगोली के ट्रेडिशनल डिजाइन बनाए जाते हैं जो देखने में बहुत
खूबसूरत होते हैं। सिंगापुर की दिवाली की तस्वीरें देख ऐसा लगता है मानों एक बार
ही सही इस देश के दिवाली सेलिब्रेशन का हिस्सा बना जाएं।
- नेपाल- में दीवाली का त्योहार पांच दिनों
तक चलता है। पहले दिन कौवे की पूजा की जाती है। उसे प्रसाद दिया जाता है। दूसरे
दिन कुत्ते को उसकी ईमानदारी के लिए प्रसाद दिया जाता है। तीसरे दिन गाय को प्रसाद
दिया जाता है। चौथे दिन बैल को प्रसाद दिया जाता है।
- मलेशिया- में दीपावली के दिन दूसरे धर्मों
के लोगों को घर पर दावत दी जाती है।
- श्रीलंका- में दीपावली का त्यौहार तमिल संप्रदाय
के लोग मनाते हैं। इस दिन नृत्य, दावते और आतिशबाजी की जाती है।
- संयुक्त राज्य अमेरिका- में दीपावली का त्यौहार व्हाइट हाउस
में मनाया जाता है। पहली बार सन 2003 में व्हाइट हाउस में दीपावली का त्यौहार
मनाया गया था। पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज बुश द्वारा इसकी घोषणा की गई थी। सन
2009 में राष्ट्रपति बराक ओबामा भी दिवाली के उत्सव में सम्मिलित हुए थे।
- ब्रिटेन- में बड़ी मात्रा में भारतीय रहते
हैं। प्रिंस चार्ल्स बहुत बार दीपावली के उत्सव में शामिल हो चुके हैं। ब्रिटेन
के स्वामीनारायण मंदिर में दीपावली का त्यौहार मुख्य रूप से मनाया जाता है।
- मॉरीशस- में बड़ी मात्रा में हिंदू रहते हैं।
दीपावली के दिन वहां पर सरकारी अवकाश होता है।
सादर / साभार
अनीष व्यास
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