आज तय होगा प्रत्याशियों की जीत और हार का फैसला

आज तय होगा प्रत्याशियों की जीत और हार का फैसला 
अनीष व्यास 
स्वतत्र पत्रकार 
11 दिसंबर यानि कल होने वाली वोटों की गिनती का इन्तजार हो रहा है आने वाला सवेरा ही तय करेगा कि प्रदेश में किसकी सरकार होगी? आज की रात नेताओं के लिए इतनी कठिन लग रही है कि पता नहीं उन्हें नींद भी आएगी या नहीं? 6 अक्टूबर को चुनावों को लेकर आचार संहिता लगने के बाद से ही राजस्थान के नेता चुनाव मैदान में सक्रिय थेवोटिंग के बाद नेता और कार्यकर्ता आराम भी कर चुके हैं लोकतन्त्र का सबसे बड़ा पर्व मनाया जा रहा हैज्यादातर कवायद हो चुकी है लेकिन इस कवायद का नतीजा 11 को ही आएगाप्रदेश की सभी 199 सीटों पर वोटों की गिनती सुबह आठ बजे से शुरू होगी हालांकि, चुनाव के दौरान दोनों पार्टियों ने चुनाव प्रचार में पूरी ताकत झोंकी, सभी ने अपनी-अपनी जीत के दावे भी किए. कांग्रेस ने जब वोटिंग के बाद जनता का आभार जताया और जीत के दावे किए तो उनके नेताओं की बॉडी लैंग्वेज से भी लग रहा था कि वे जीत के प्रति आश्वस्त हैं कांग्रेस नेताओं का कहना है कि एग्जिट पोल से भी ज्यादा सीटें उनकी पार्टी को मिलेंगी.दावे सबके अपने-अपने हैं, लेकिन प्रत्याशियों की किस्मत का भाग्य तो ईवीएम में बंद है  बहरहाल ईवीएम मंगलवार को खुलेगी लेकिन उससे पहले एग्जिट पोल की भविष्यवाणियों ने बीजेपी नेताओं के दिमाग में दंगल मचा रखा है सभी कयासों के बीच वसुंधरा राजे के साथ ही बीजेपी के ज्यादातर नेता एग्जिट पोल से एग्जिट होना ही पसन्द कर रहे हैं  वे कहते हैं कि एग्जिट पोल तो पहले भी गलत साबित हुए हैं और राजस्थान में एक बार फिर बीजेपी ही सरकार बनाएगी एक्जिट पोल अनुमान के आधार पर राजस्थान में बहुमत के करीब नजर रही कांग्रेस में कयासों का दौर गरम है। पार्टी में मुख्यमंत्री पद के दावेदारों के समर्थक अपने-अपने नेता के पक्ष में दांव लगाते नजर रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री कांग्रेस महासचिव अशोक गहलोत और राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट को प्रमुख दावेदारों के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी नेता किसी अप्रत्याशित नाम की संभावना से इनकार नहीं कर रहे हैं। 
एक संभावना यह जाहिर की जा रही है कि स्पष्ट बहुमत मिलने पर पायलट का दावा मजबूत हो सकता है। जबकि मामला करीबी बढ़त का होने पर पार्टी अनुभवी नेता गहलोत पर दांव लगा सकती है। कुछ नेताओं का तर्क है कि लोकसभा चुनाव के मद्देनजर पार्टी जातीय समीकरण और अनुभव को ध्यान में रखकर मुख्यमंत्री का फैसला करेगी। हालांकि पार्टी नेता अंतिम नतीजों तक इंतजार करने को कह रहे हैं। 
बड़ी जीत संभव
एक नेता ने कहा कि कोई भी औपचारिक चर्चा नतीजों के बाद संख्याबल की स्थिति पर होगी। कांग्रेस राजस्थान में जीत को लेकर सबसे ज्यादा आश्वस्त है। पार्टी नेता दावा कर रहे हैं कि अनुमान में दिखाई गई सीटों से कहीं ज्यादा बड़ी जीत राजस्थान में मिल सकती है।
आलाकमान करेगा फैसला
सूत्रों ने कहा कि राजस्थान में अपेक्षानुकुल नतीजे आए तो मुख्यमंत्री पद पर फैसला विधायकों की राय के आधार पर आलाकमान करेगा। पार्टी के ज्यादातर बड़े नेता अभी किसी नाम पर दांव लगाने से परहेज कर रहे हैं। गहलोत और पायलट ने भी इस मामले में सधी हुई बयानबाजी की है। लेकिन समर्थकों की उम्मीदें बहुत ज्यादा हैं। 
पायलट ने फिजा बदली
सचिन पायलट के समर्थन में तर्क दिया जा रहा है कि उन्होंने अध्यक्ष के तौर पर प्रदेश के हर कोने में जाकर संगठन को मजबूत करने और वसुंधरा सरकार के खिलाफ माहौल बनाने के लिए अथक परिश्रम किया। इसके चलते फिजा बदली। 
गहलोत सबसे लोकप्रिय
गहलोत समर्थकों का कहना है कि वह अभी भी राज्य में सबसे ज्यादा लोकप्रिय नेता हैं। कई सर्वे में भी उन्हें मुख्यमंत्री पद की पसंद के तौर पर ऊपर बताया गया था। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में अलग-अलग अनुमानों के चलते पार्टी बड़ी जीत के दावे के बावजूद सतर्क है।
विधानसभा चुनाव का परिणाम मंगलवार को आएगा,लेकिन एग्जिट पोल से उत्साहित कांग्रेस के दिग्गजों ने दिल्ली में ड़ेरा जमा लिया है। अब तक कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अशोक गहलोत और पीसीसी अध्यक्ष सचिन पायलट के बीच ही सीएम पद को लेकर जोर अजमाइश चल रही थी, लेकिन सोमवार को राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता रामेश्वर डूडी ने भी "जाट,किसान मुख्यमंत्री "का मुद्दा उठाते हुए अपना दावा पेश किया है।
वहीं पूर्व केन्द्रीय मंत्री डॉ.सी.पी.जोशी और डॉ.गिरिजा व्यास भी खुद के लिए संभावनाएं तलाशने में जुटे है। उधर सीएम वसुंधरा राजे एग्जिट पोल पर अभी भी विश्वास नहीं कर रही है। वसुंधरा राजे का मानना है कि राज्य में खंडित जनादेश मिलेगा
नेताओं के समर्थक दिल्ली पहुंचे
कांग्रेस के सत्ता में अाने की उम्मीद के चलते सभी बड़े नेता पिछले तीन दिन से दिल्ली में डेरा डाले हुए है। सचिन पायलट और अशोक गहलोत के बीच सीएम पद को लेकर अंदरखाने मची खिंचतान में दोनों ही नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी से मिल चुके है। अब रामेश्वर डूडी ने भी राहुल गांधी से समय मांगा है रामेश्वर डूडी समर्थक जाट नेता सोमवार को दिल्ली पहुंचे है। ये नेता दिल्ली में राहुल गांधी के साथ ही अहमद पटेल,प्रदेश प्रभारी राष्ट्रीय महासचिव अविनाश पांडे और गुलाम नबी आजाद सहित अन्य नेताओं से मिलकर "जाट,किसान मुख्यमंत्री " को लेकर राज्य की पुरानी मांग पूरी करने का आग्रह करेंगे।रामेश्वर डूडी समर्थकों ने अन्य राज्यों के जाट नेताओं से भी सहयोग मांगा है। रामेश्वर डूडी समर्थकों के वीडियो भी मोबाइल पर वायरल हो रहे है। गहलोत और पायलट ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी से मिलकर चुनाव का फिडबैक देने के बहाने अपनी दावेदारी भी जता दी है
युवा नेता पायलट के पक्ष में
राज्य के अधिकांश युवा नेता सचिन पायलट को सीएम बनाए जाने के पक्ष में है। इनमें विधानसभा चुनाव लड़ने वाले नेताओं के अलावा अग्रिम संगठनों के पदाधिकारी भी शामिल है। इन नेताओं का तर्क है कि पायलट को सीएम बनाए जाने से राज्य में पार्टी आगामी 20 से 25 साल तक के लिए टीम तैयार कर सकेगी। इनका यह भी कहना है कि पायलट ने पांच साल में पार्टी को मजबूत करने के लिए काफी काम किया है। ये नेता विभिन्न माध्यमों से दिल्ली तक अपनी बात पहुंचाने में जुटे है। उधर गहलोत गुट का कहना है कि लोकसभा चुनाव जीतने तक अशोक गहलोत को सीएम बनाया जाना चाहिए
वसुंधरा राजे भी सक्रिय
मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को एग्जिट पाल पर विश्वास नहीं है। वसुंधरा राजे का मानना है कि मतदाता खंडित जनादेश देंगे और भाजपा निर्दलीयों के सहयोग से सरकार बना सकती है। इसी संभावना को तलाशने में जुटी वसुंधरा राजे ने पिछले तीन दिन में ऐसे निर्दलीय उम्मीदवारों से सम्पर्क साधा है,जिनकी चुनाव में जीतने की संभावना है  

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