सरकार बनाने के लिए जीतने योग्य निर्दलियों पर रहेगी नजर
सरकार बनाने के लिए जीतने योग्य निर्दलियों पर रहेगी नजर
अनीष व्यास
स्वतत्र पत्रकार
राजस्थान की 199 विधानसभा सीटों
पर हुए मतदान
का रिजल्ट 11 दिसंबर
को आएगा। लेकिन
एग्जिट पोल के
नतीजों और दोनों
ही दलों की
ओर से खुद
के स्तर पर
कराए गए सर्वे
के आंकलनों के
बाद भाजपा और
कांग्रेस सियासी गुणा-भाग
में जुट गई।
दोनों ही दलों
के दिग्गज नेता
जयपुर
से लेकर दिल्ली
तक दौड़-भाग
करते रहे। मकसद-सरकार बनाने के
लिए जरूरी 101 विधायकों
का जादुई आंकड़ा
छूना है।जरूरी संख्याबल
जुटाने के लिए
अन्य दलों और निर्दलीयों को साधने
की रणनीतियां भी
बनाई जा रही
हैं। भाजपा-कांग्रेस
की नजर उन
50 से ज्यादा बड़े
बागियों पर भी
है, जिन्होंने निर्दलीय
के रूप में
चुनाव लड़ा है।
दोनों दलों की
चिंता इस बार
पिछले चुनाव से
1.46 फीसदी कम मतदान
ने भी बढ़ा
रखी है।
राजस्थान में मतदान
खत्म होने के
बाद एग्जिट पोल
जारी कर दिए
गए हैं। 8 एग्जिट
पोल ने राजस्थान
में कांग्रेस की
सरकार बनती नजर
आ रही है
और एक पोल
यहां मुकाबला बता
रहा है। इंडिया
टुडे-एक्सिस माय
इंडिया, न्यूज 24, न्यूज नेशन,
न्यूज एक्स, इंडिया
टीवी, टाइम्स नाउ-सीएनएक्स, न्यूज 24 और
एबीपी के एग्जिट
पोल में राजस्थन
में कांग्रेस की
सरकार बनती नजर
आ रही है।
वहीं रिपब्लिक टीवी
राजस्थान में कांग्रेस
और भाजपा में
करीबी मुकाबला बता
रहा है।
राजस्थान में सत्तारूढ़
भाजपा इस बार सत्ता विरोधी लहर का सामना कर रही थी और इसका अंदाजा इस वर्ष की शुरुआत
में अजमेर और अलवर लोकसभा सीट तथा मांडलगढ़ विधानसभा सीट के उपचुनाव में लग गया था,
जब पार्टी न सिर्फ तीनों चुनाव हारी, बल्कि लोकसभा सीटों के तहत आने वाली 16 विधानसभा
सीटों पर भी पीछे रही। विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी की हार तय मानी जा रही थी और
यहां तक कहा जा रहा था कि इस बार बहुत बड़ी हार का सामना करना पड़ सकता है।
टिकट वितरण में
चार मंत्रियों सहित 56 विधायकों के टिकट काटे गए और जब कांग्रेस के टिकट वितरण में
खामियां सामने आई तो स्थिति कुछ सुधरी। इसके बाद पार्टी अध्यक्ष अमित शाह की रणनीति,
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित पार्टी के स्टार प्रचारकों के आक्रामक प्रचार अभियान
से लगा कि पार्टी एक बार फिर टक्कर में आ गई है। अब मतदान प्रतिशत पिछली बार के मुकाबले
नहीं बढ़ने को पार्टी के नेता अपने पक्ष में बता रहे हैं।
पार्टी से जुड़े
सूत्रों का कहना है कि मतदान प्रतिशत में कुछ बढ़ोतरी होती तो माना जा सकता था कि हम
पूरी तरह हार रहे हैं, लेकिन मतदान प्रतिशत बढ़ा नहीं है और हमारे पास हर सीट से जिस
तरह की सूचनाएं आ रही हैं, उसे देखते हुए अभी भी हमें पूरी उम्मीद है कि हम सरकार बना
लेंगे। बताया जा रहा है कि पार्टी को 90 से ज्यादा सीटों पर जीत की उम्मीद है। पार्टी
अध्यक्ष मदनलाल सैनी ने भी मीडिया से बातचीत में दावा किया कि उनकी पार्टी फिर से सरकार
बना रही है। उन्होंने कहा कि अभी 11 दिसंबर का इंतजार कीजिए।
भाजपा रणनीतिकार
हुए सक्रिय
इस बीच पार्टी के रणनीतिकार सक्रिय हो गए हैं। दिनभर पार्टी मुख्यालय में हर सीट और बूथ पर हुए मतदान का विश्लेषण किया गया। जिलों से रिपोर्ट मंगाई गई और जीतने की संभावना वाले निर्दलीय प्रत्याशियों से भी संपर्क शुरू कर दिया गया।मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने झालावाड़ में नेताओं से चर्चा की और दोपहर बाद पार्टी मुख्यालय पहुंचीं। यहां पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मदनलाल सैनी, चुनाव प्रबंध समिति के संयोजक गजेंद्र सिंह शेखावत, पूर्व अध्यक्ष अशोक परनामी, संगठन महामंत्री चंद्रशेखर और अन्य नेताओं से चर्चा की गई और फीडबैक लिया गया। पार्टी सूत्रों का कहना है कि पार्टी परिणाम बाद की सभी संभावनाओं को देखते हुए काम कर रही है। केंद्रीय नेतृत्व भी संपर्क में है। निर्दलीयों को साधने केंद्रीय नेताओं के साथ ही पार्टी की कोर कमेटी के सदस्य और अन्य प्रभावी नेताओं को सक्रिय किया गया है।
इस बीच पार्टी के रणनीतिकार सक्रिय हो गए हैं। दिनभर पार्टी मुख्यालय में हर सीट और बूथ पर हुए मतदान का विश्लेषण किया गया। जिलों से रिपोर्ट मंगाई गई और जीतने की संभावना वाले निर्दलीय प्रत्याशियों से भी संपर्क शुरू कर दिया गया।मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने झालावाड़ में नेताओं से चर्चा की और दोपहर बाद पार्टी मुख्यालय पहुंचीं। यहां पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मदनलाल सैनी, चुनाव प्रबंध समिति के संयोजक गजेंद्र सिंह शेखावत, पूर्व अध्यक्ष अशोक परनामी, संगठन महामंत्री चंद्रशेखर और अन्य नेताओं से चर्चा की गई और फीडबैक लिया गया। पार्टी सूत्रों का कहना है कि पार्टी परिणाम बाद की सभी संभावनाओं को देखते हुए काम कर रही है। केंद्रीय नेतृत्व भी संपर्क में है। निर्दलीयों को साधने केंद्रीय नेताओं के साथ ही पार्टी की कोर कमेटी के सदस्य और अन्य प्रभावी नेताओं को सक्रिय किया गया है।
बैठक के बाद गजेंद्र
सिंह शेखावत ने कहा कि बैठक में हमने अब तक सामने आए फीडबैक पर चर्चा की और जो जानकारी
सामने आई है, उसके अनुसार हम बहुमत हासिल करेंगे और सरकार बनाएंगे। हमने चुनाव प्रबंधन
के दौरान सामने आई स्थितियों पर भी चर्चा की और यह भी देखा कि क्या कमियां रहीं, अगले
चुनाव में उन्हें दूर किया जाएगा।
भाजपा और कांग्रेस के बीच हमेशा कड़ा मुकाबला रहा
यहां
भाजपा और कांग्रेस
के बीच हमेशा
कड़ा मुकाबला रहा
है। 1993 से अब
तक हुए हुए
पांच विधानसभा चुनावों
में इन दोनों
पार्टियों के बीच
सत्ता की अदला-बदली होती
रही है। 1952 से अब तक राजस्थान विधानसभा के 14 चुनाव हो चुके हैं।
9 बार कांग्रेस की सरकारें बनी तो 4 बार भाजपा सत्ता में रही। एक बार जनता पार्टी की
सरकार रही थी।
मौजूदा
मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के
सामने 20 साल से
चली आ रही
इस परंपरा को
तोड़ने की चुनौती
है कि राजस्थान
में लगातार दो
बार किसी पार्टी
की सरकार नहीं
बनती। चुनौती इसलिए
और भी बड़ी
है क्योंकि इसी
साल फरवरी में
हुए लोकसभा उपचुनाव
(अलवर, अजमेर) और विधानसभा
उपचुनाव (मंडलगढ़) में भाजपा
को हार का
सामना करना पड़ा
है। हालांकि इसके
बाद किरोणीलाल मीणा
को प्रदेश अध्यक्ष
बनाने जैसे कदम
उठाकर भाजपा ने
डैमेज कंट्रोल के
कदम उठाए हैं।
कांग्रेस भी बूथ
लेवल पर जोर
दे रही है।
एग्जिट पोल और सर्वे में कांग्रेस के सरकार में आने की संभावना
राजस्थान विधानसभा चुनाव में
मतदान के बाद
आए एग्जिट पोल
और सर्वे में
कांग्रेस के सरकार
में आने की
संभावना जताई जा
रही है। चुनाव
परिणाम तो 11 दिसम्बर को
आएंगे, लेकिन कांग्रेस में
मुख्यमंत्री पद को
लेकर लॉबिंग तेज
हो गई है।
पूर्व सीएम अशोक
गहलोत और प्रदेश
कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट
के खेमे सक्रिय
हो गए हैं।
गहलोत और पायलट
के निकटस्थ संभावित
विधायकों से सम्पर्क
साध रहे हैं।
शुक्रवार को मतदान
सम्पन्न होने से
पूर्व ही अशोक
गहलोत दिल्ली पहुंचे
गए, वहीं सचिन
पायलट देर रात
दिल्ली पहुंचे।
कांग्रेसी उत्साहित,
निर्दलियों से साधा जा रहा संपर्क
एग्जिट पोल और सर्वे में कांग्रेस का पूर्ण बहुमत मिलने की संभावना जताए जाने से कांग्रेस नेता उत्साहित है। सचिन पायलट कैंप और अशोक गहलोत खेमा अपने-अपने नेता को सीएम बनाने की रणनीति में जुट गए हैं। विधायक दल की बैठक में कौनसा विधायक किसका समर्थन करेगा इसे लेकर दोनों खेमे सक्रिय हो गए। कुछ संभावित विधायकों ने दोनों नेताओं ने खुद टेलीफोन पर संपर्क किया है।
एग्जिट पोल और सर्वे में कांग्रेस का पूर्ण बहुमत मिलने की संभावना जताए जाने से कांग्रेस नेता उत्साहित है। सचिन पायलट कैंप और अशोक गहलोत खेमा अपने-अपने नेता को सीएम बनाने की रणनीति में जुट गए हैं। विधायक दल की बैठक में कौनसा विधायक किसका समर्थन करेगा इसे लेकर दोनों खेमे सक्रिय हो गए। कुछ संभावित विधायकों ने दोनों नेताओं ने खुद टेलीफोन पर संपर्क किया है।
कांग्रेस जीतने योग्य निर्दलियों से संपर्क
गहलोत और पायलट
खेमे के लोग
जीतने योग्य निर्दलियों
के भी संपर्क
में है। एक
तरफ तो कांग्रेस
में सीएम पद
को लेकर अंदर
खाने रस्साकशी चल
रही है, वहीं
दूसरी तरफ जयपुर
शहर जिला कांग्रेस
के अध्यक्ष प्रताप
सिंह खाचरियावास का
एक वीडियो वायरल
हुआ है, जिसमें
वे कह रहे
है कि गहलोत
कौन होते है
मुख्यमंत्री बनाने वाले। खाचरियावास
कह रहे है
कि हमारे नेता
राहुल गांधी हैं,
वे जो कहेंगे
वह फैसला हमें
मंजूर होगा। खाचरियावास
ने एक टीवी
चैनल से बातचीत
में भी यही
बात कही है।
खाचरियावास का बयान
आने के बाद
गहलोत खेमा सक्रिय
हो गया है।
खाचरियावास पीसीसी अध्यक्ष सचिन
पायलट के काफी
निकट माने जाते
हैं।
खाचरियावास
ने पिछले पांच
साल में पायलट
के साथ मिलकर
वसुंधरा राजे सरकार
के खिलाफ कई
आंदोलन किए हैं।
जयपुर स्थित प्रदेश
कांग्रेस मुख्यालय में शनिवार
को दिनभर अलग-अलग चर्चाओं
का दौरा जारी
रहा, हालांकि अधिकांश
कांग्रेसी यह कहते
नजर आए कि
पायलट ने पार्टी
की कमान उस
समय संभाली थी
जब आजादी के
बाद सबसे कम
21 सीटें कांग्रेस को मिली
थी और अब
सरकार बनने की
तैयारी है। ये
लोग कहते हैं
कि सरकार की
कमान भी पायलट
के हाथ में
ही होनी चाहिए।
हार का जिम्मेदार किसे ठहराया जाए
राजस्थान विधानसभा
चुनाव के नतीजे 11 दिसंबर को आएंगे, लेकिन मतदान के बाद सामने आए एग्जिट पोल सट्टा
बाजार के आंकड़ों में भाजपा की सरकार से विदाई होना बताया जा रहा है।एग्जिट पोल
में कांग्रेस की सरकार बनना तय बताया जा रहा है। अब भाजपा में इस बात की चर्चा होने
लगी है कि यदि एग्जिट पाल और सट्टा बाजार के कयास नतीजों में तब्दील होते है तो हार
का जिम्मेदार किसे ठहराया जाएगा।विभिन्न एग्जिट पोल और सट्टा बाजार कांग्रेस के खाते
में 110 से 140 सीटें जाती दिखा रहे है। इनके मुताबिक भाजपा को 55 से 70 सीटें मिल
सकती है। वहीं 2013 के चुनाव में भाजपा को 163 सीटें और कांग्रेस को मात्र 21 सीटें
हासिल हुई थीं। ऐसे में भाजपा के भीतर यह चर्चा होने लगी है कि एक्जिट पोल और सट्टा
बाजार के कयास अगर नतीजों में बदलते हैं तो पार्टी की हार का जिम्मेदार किसे माना जाएगा।
हार की जिम्मेदारी सीएम वसुंधरा राजे की होगी या फिर संगठन की होगी।
वसुंधरा खेमा कुछ
समय पहले से ही एक तर्क देने में जुटा है कि करीब एक साल से सीएम को खुलकर काम नहीं
करने दिया गया। बार-बार पार्टी के नेताओं का एक वर्ग यह अफवाह फैलाने में जुटा रहा
कि सीएम को हटाया जा रहा है। इस कारण माहौल खराब हुआ। आलाकमान ने भी चुनाव से ठीक पहले
सीएम के नेतृत्व में ही मैदान में जाने की बात अधिकारिक रूप से कही।
सीएम खेमे का कहना
है कि अगर यह बात पहले ही कह दी जाती तो हालात सुधारे जा सकते थे। संघ से जुड़े भाजपा
नेता और सीएम खेमा अभी से संभावित हार की जिम्मेदारी तय करने को लेकर रणनीति बनाने
में जुटे है। रणनीति बनाते समय राजपूत समाज द्वारा दिए गए नारे 'कमल का फूल, हमारी
भूल' और 'मोदी से बैर नहीं वसुंधरा तेरी खैर नहीं' को भी केन्द्र में रखा जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि
चुनाव अभियान के दौरान पीएम मोदी ने 13 रैलियां की हैं। वहीं भाजपा अध्यक्ष अमित शाह
ने प्रदेश के सभी जिलों का दौरा किया। अमित शाह ने सरकार में सुनवाई नहीं होने से सुस्त
बैठे कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया। सीएम वसुंधरा राजे ने भी 75 रैलियां करने के साथ
ही पूरे प्रदेश में यात्रा निकाली। पार्टी के अन्य बड़े नेताओं ने कुल 222 रैलियां
और 15 रोड शो किए।
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