इस बार बेहद खास है रक्षाबंधन...समय से बंधन मुक्त हुई राखी
इस बार बेहद खास है रक्षाबंधन...समय से बंधन मुक्त हुई राखी
रंजीता व्यास
लेखिका
रक्षा बंधन भाई बहन के अनूठे प्रेम, स्नेह और अटूट रिश्ते को दर्शाता है जिसका भाई व बहनों को पूरे साल से इंतजार रहता है। यह वह दिन होता है जिस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उनकी दीर्घायु, सुख शांति एवं समृद्धि की जी जान से कामना करती हैं। वहीं भाई भी बहन को यथा शक्ति उपहार तथा उसकी सुरक्षा का भरोसा देता है। इस बार सावन महीने में 15 अगस्त के दिन चंद्र प्रधान श्रवण नक्षत्र में स्वतंत्रता दिवस और रक्षा बंधन का संयोग एक साथ बन रहा है और राखी बांधने का मुहूर्त भी काफी लंबा है। पण्डित अनुप जोशी और ज्योतिषाचार्य मनीष व्यास के अनुसार आम तौर पर राखी के दिन बहनों को भाइयों की कलाई पर राखी बांधने के लिए संक्षिप्त ही समय मिलता रहा है परंतु इस बार इस पर्व पर भद्रा का साया नहीं है जिसके कारण पूरा दिन राखी बांधने के लिए शुभ है और इंतजार नहीं करना पड़ेगा। इस बार राखी बांधने के लिए 12 घंटे और 58 मिनट की अवधि का लंबा शुभ मुहूर्त है और राखी सुबह 6 बजकर 2 मिनट से लेकर शाम 7 बजे तक कभी भी बांधी जा सकेगी। रक्षा बंधन, जिसे लोकप्रिय रूप में राखी ही कहा जाता है, भाई बहनों के पवित्र बंधन को और मजबूत बनाने का दिन होता है। वैसे तो ये हिंदू धर्म का त्योहार है, लेकिन कई अन्य धर्मों में भी लोग इसे अपने तरीके से मनाते हैं। बहनें प्यार और स्नेह की निशानी के रूप में अपने भाई की कलाई पर एक पवित्र धागा बांधती हैं और बदले में भाई अपनी बहनों की रक्षा करने का संकल्प लेता है। हांलाकि समय के साथ इसमें काफी बदलाव भी आया है। अब भाई की ओर से बहनों को उपहार देना भी सम्मलित हो गया गया है।रक्षाबंधन दो शब्दों से मिलकर बना है रक्षा और बंधन जिसका अर्थ है रक्षा के बंधन में बंधना । ये एक ऐसा त्योहार है जो केवल भाई-बहनों के खून के रिश्ते को ही परिभाषित नहीं करता बल्कि ये करीबी रिश्ते वालों के लिए भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है। यानी भाई और बहन का खून का हो यह जरूरी नहीं। रक्षाबंधन वो बंधन है जो मन और दिल से जुड़ता है।
अटूट रिश्ते का इतिहास
धर्माचार्यो ने कहा कि धार्मिक मान्यता के अनुसार शिशुपाल राजा का वध करते समय भगवान श्री कृष्ण के बाएं हाथ से खून बहने लगा तो द्रोपदी ने तत्काल अपनी साड़ी का पल्लू फाड़कर उनके हाथ की अंगुली पर बांध दिया। कहा जाता है कि तभी से भगवान कृष्ण द्रोपदी को अपनी बहन मानने लगे और सालों के बाद जब पांडवों ने द्रोपदी को जुए में हरा दिया और भरी सभा में जब दुशासन द्रोपदी का चीरहरण करने लगा तो भगवान कृष्ण ने भाई का फर्ज निभाते हुए उसकी लाज बचाई थी। मान्यता है कि तभी से रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाने लगा जो आज भी बदस्तूर जारी है। श्रावण मास की पूर्णिमा को भाई-बहन के प्यार का त्योहार रक्षाबंधन मनाया जाता है। इस वर्ष रक्षाबंधन 15 अगस्त दिन गुरुवार को है। रक्षाबंधन का त्योहार गुरुवार को होने से इसका महत्व और बढ़ गया है। इस दिन भद्रा नहीं है और न ही किसी प्रकार का कोई ग्रहण है। इस वजह से इस वर्ष का रक्षाबंधन शुभ संयोग लिए है और सौभाग्यशाली भी है। हिंदू धर्म में रक्षा बंधन के त्योहार का बहुत ही अधिक महत्व है। इस पर्व को भाई-बहन का त्योहार माना जाता है। इस दिन बहनें अपने भाईयों के कलाई में रक्षा सूत्र बांधती है। इसके साथ ही लंबी उम्र की कामना करती है। कई सालों बाद ऐसा होगा जब इस भाई-बहन के पवित्र त्योहार में कोई भी बुरा वक्त यानी अशुभ योग नहीं होगा। कहा जाता है कि भद्रा में बहनें भाइयों को राखी नहीं बांधती हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, रावण की बहन ने भद्रा में उसे रक्षा सूत्र बांधा था, जिससे रावण का सर्वनाश हो गया था। इस बार राखी बांधने का मुहूर्त काफी अच्छा है, बहनें सूर्यास्त से पूर्व तक भाइयों को राखी बांध सकती हैं।
राखी बांधने वक्त शुभ मुहूर्त पर विशेष ध्यान दिया जाता है। लेकिन इस वर्ष रक्षा बंधन का त्योहार कई मायनों में खास होने जा रहा है। इस वर्ष ना केवल रक्षाबंधन पर विशेष योग बन रहे हैं बल्कि राखी बांधने का मुहूर्त भी लंबा रहेगा। लंबे समय बाद इस बार रक्षाबंधन पर ना केवल शुभ मुहूर्त लंबा रहेगा बल्कि भद्रा का साया भी नहीं रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं में भद्रा में शुभ कार्य करना निषिद्ध माना गया है। हालांकि एक सच्चाई यह भी है कि भद्रा हमेशा अशुभ नहीं रहता।
इस बार राखी बांधने का शुभ मुहूर्त सुबह पांच बजकर 49 मिनट से शुरू होगा और शाम छह बजकर एक मिनट तक बहनें भाई की कलाई में राखी बांध सकती है। इस दिन सुबह छह से 7.30 बजे और सुबह 10.30 बजे से अपराह्न तीन बजे तक राखी बांधने का सबसे अच्छा मुहूर्त रहेगा। सावन की पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 14 अगस्त को अपराह्न तीन बजकर 45 मिनट से हो जाएगी और यह 15 अगस्त की शाम पांच बजकर 58 मिनट तक रहेगी।
रक्षा बंधन का शुभ मुहूर्त
इस बार राखी बांधने का मुहूर्त बहुत ही लंबा है। रक्षा बंधन 2019 में बहने अपने भाई को सुबह 5 बजकर 49 मिनट से शाम 6 बजकर 1 मिनट तक राखी बांध सकती हैं।
रक्षा बंधन पांचांग
रक्षा बंधन अनुष्ठान का समय- सुबह 05:53 से शाम 5:58
अपराह्न मुहूर्त- दोपहर 1:43 से
शाम 4:20
पूर्णिमा तिथि आरंभ – दोहपर 3:45 (14 अगस्त)
पूर्णिमा तिथि समाप्त- शाम 5:58 (15 अगस्त)
भद्रा समाप्त: सूर्योदय से पहले
राखी बांधने की पूजा विधि
रक्षाबंधन के दिन अपने भाई को इस तरह राखी बांधें। सबसे पहले राखी की थाली सजाएं। इस थाली में रोली, कुमकुम, अक्षत, पीली सरसों के बीज, दीपक और राखी रखें। इसके बाद भाई को तिलक लगाकर उसके दाहिने हाथ में रक्षा सूत्र यानी कि राखी बांधें। राखी बांधने के बाद भाई की आरती उतारें। फिर भाई को मिठाई खिलाएं। अगर भाई आपसे बड़ा है तो चरण स्पर्श कर उसका आशीर्वाद लें। अगर बहन बड़ी हो तो भाई को चरण स्पर्श करना चाहिए। राखी बांधने के बाद भाइयों को इच्छा और सामर्थ्य के अनुसार बहनों को भेंट देनी चाहिए। ब्राह्मण या पंडित जी भी अपने यजमान की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधते हैं।
ऐसा करते वक्त इस मंत्र का उच्चारण करना चाहिए:
ॐ येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः।
तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल।।
राखी बंधवाते समय भाई को किस दिशा में अपना मुंह करें
राखी बंधवाते समय भाई अपना मुंह पश्चिम दिशा में करके बैठें। दरअसल सुबह 05:30 बजे चन्द्रमा कुंभ राशि में 3 डिग्री का होगा और ये सारे दिन उत्तर की तरफ बढ़ेगा। इस स्थिति में अगर आप पश्चिम की ओर बैठेंगे तो सुबह सुबह चन्द्रमा आपके सामने होगा और बाकी दिन ये दाहिनी ओर जाता जायेगा। आपको बता दें कि सामने का और दाहिनी ओर का चन्द्रमा शुभ होता है। अतः राखी बंधवाते समय भाई अगर पश्चिम दिशा की ओर मुंह करके बैठे तो अच्छा होगा।
इस दिन सभी बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधने से पहले एक विशेष थाली सजाती है।
पूजा की थाली में रखनी चाहिए यह खास 7 चीजें अनिवार्य रूप से होनी चाहिए।
1) कुमकुम- बहन भाई को कुमकुम का तिलक लगाती है जो सूर्य ग्रह से मिलता है और दुआएँ करती है कि आने वाले साल में भाई को हर प्रकार का यश और ख्याति प्राप्त हो।
2) चावल(अक्षत) - पूजा में चावल को सबसे शुभ माना जाता है। बहन भाई को कुमकुम के तिलक के ऊपर चावल लगाती है, जो कि शुक्र ग्रह से मिलता है और दुआएँ करती है कि "मेरे भाई के जीवन में हर तरह की शुभता आए और मेरा मेरे भाई से हमेशा प्रेम बना रहे।"
3) नारियल - इसको पूजा में श्रीफल कहा जाता है। यह राहु ग्रह से मिलता है। बहन जब भाई को श्रीफल देती है तो इसका अर्थ है कि आने वाले वर्ष में भाई को सभी प्रकार के सुख सुविधा के मिले।
4) रक्षा सूत्र (राखी) - रक्षासूत्र हमेशा दाएँ हाथ की कलाई पर बांधा जाता है। यह मंगल ग्रह से मिलता है, जो कहता है कि बहन की दुआएँ हैं कि उसके भाई सभी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष मुश्किलों से उसकी रक्षा करें।
5) मिठाई- बहन भाई को मिठाई खिलाती है जो कि गुरु ग्रह से मिलता है, और दुआ करती है कि उसके भाई पर लक्ष्मी की कृपा रहे। भाई के संतान और वैवाहिक जीवन भी सुखद रहे। भाई के घर में सभी कार्य निर्विघ्न पूरे हों।
6) दीपक- फिर बहन भाई की दीपक से आरती करती है, जो शनि और केतु ग्रह से मिलता है और दुआएँ करती है कि मेरे भाई के जीवन में आने वाले रोग और कष्ट सभी दूर हों।
7) जल से भरा कलश - फिर जल से भरे कलश से भाई की पूजा करें, जो कि चंद्रमा से मिलता है, जिसमें बहन दुआएँ करती है कि मेरे भाई के जीवन में मानसिक शांति हमेशा बनी रहे।
8) उपहार - ऊपर की इन 7 चीजों में बहन की दुआओं के साथ आप के 8 ग्रह शुभ होते हैं। अब रहा नवाँ ग्रह - बुध। बुध ग्रह को बहन का कारक ग्रह माना गया है। अब आप जो बहन को उपहार देंगे उससे आपका बुध ग्रह शुभ होकर फल देगा। कहते हैं बुध ग्रह जो आपके व्यापार से मिलता है, अगर आपकी बहन या भाई की दुआएँ मिल जाए तो आपके व्यापार में वृद्धि कर देता है। इसलिए हमेशा अपनी बहन को गिफ्ट देकर उनकी दुआएँ लेते रहें।
जोधपुर के प्रसिद् ज्योतिषाचार्य मनीष व्यास से जानते हैं राशि अनुसार बहनें अपने भाई को हाथ पर कोनसे कलर की राखी बांधें।
मेष :- राशि के भाई को मालपुए खिलाएं एवं लाल डोरी से निर्मित राखी बांधे।
वृषभ :- राशि के भाई को दूध से निर्मित मिठाई खिलाएं एवं सफेद रेशमी डोरी वाली राखी बांधे।
मिथुन :- राशि के भाई को बेसन से निर्मित मिठाई खिलाएं एवं हरी डोरी वाली राखी बांधे।
कर्क :- राशि के भाई को रबड़ी खिलाएं एवं पीली रेशम वाली राखी बांधे।
सिंह :- राशि के भाई को रस वाली मिठाई खिलाएं एवं पंचरंगी डोरे वाली राखी बांधे।
कन्या :- राशि के भाई को मोतीचूर के लड्डू खिलाएं एवं गणेशजी के प्रतीक वाली राखी बांधे।
तुला :- राशि के भाई को हलवा या घर में निर्मित मिठाई खिलाएं एवं रेशमी हल्के पीले डोरे वाली राखी बांधे।
वृश्चिक :- राशि के भाई को गुड़ से बनी मिठाई खिलाएं एवं गुलाबी डोरे वाली राखी बांधे।
धनु :- राशि के भाई को रसगुल्ले खिलाएं एवं पीली व सफेद डोरी से बनी राखी बांधे।
मकर :- राशि के भाई को मिठाई खिलाएं एवं मिलेजुले धागे वाली राखी बांधे।
कुंभ :- राशि के भाई को ग्रीन मिठाई खिलाएं एवं नीले रंग से सजी राखी बांधे।
मीन :- राशि के भाई को मिल्क केक खिलाएं एवं पीले-नीले जरी की राखी बांधे।
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