आज करो नरक बाहर...घर आएंगी मां लक्ष्मी !!

आज करो नरक बाहर...घर आएंगी मां लक्ष्मी !!
अनीष व्यास 
ज्योतिषविद् एवं कुण्डली विश्ल़ेषक
दिवाली से एक दिन यानी आज नरक चतुर्दशी का पर्व वस्तुत: लक्ष्मी के स्वागत का पर्व है। इसको नरक चतुर्दशी के साथ ही छोटी दिवाली और रूप चतुर्दशी भी कहते हैं। इस दिन घर के नरक यानी गंदगी को दूर किया जाता है। जहां सुंदर और स्वच्छ प्रवास होता है, वहां लक्ष्मी जी अपने कुल के साथ आगमन करती हैं। उनके साथ, श्री नारायण, गणपति, शंकर जी, समस्त देवियां, कुबेर, नक्षत्र और नवग्रह होते हैं। यही लक्ष्मी कुल सुख और समृद्धि का प्रतीक है। 
इससे दो कथाएं जुड़ी हैं। एक कथा नरकासुर की है। नरकासुर का अंत वासुदेव नंदन भगवान श्रीकृष्ण ने किया था। शिवपुराण में इसी नरकासुर का अंत कार्तिकेय जी ने किया था। दोनों ही कथाओं में नरकासुर ने ब्रह्मा जी से कभी मृत्यु न होने का वरदान मांग लिया था। दूसरी कथा रंती देव नामक राजा से जुड़ी है। रंती ने कभी पाप नहीं किया, लेकिन यमराज आ गए। यमराज बोले, एक बार तुमने एक धर्मात्मा को अपने द्वार से लौटा दिया था। कालांतर में, रंती ने एक साल की मोहलत लेकर अपने जीवन को पापमुक्त किया।
देवी लक्ष्मी धन की प्रतीक हैं। धन का अर्थ केवल पैसा नहीं होता। तन-मन की स्वच्छता और स्वस्थता भी धन का ही कारक हैं। धन और धान्य की देवी लक्ष्मी जी को स्वच्छता अतिप्रिय है। धन के नौ प्रकार बताए गए हैं। प्रकृति, पर्यावरण, गोधन, धातु, तन, मन, आरोग्यता, सुख, शांति समृद्धि भी धन कहे गए हैं।.
लंबी उम्र के लिए नरक चतुर्दशी के दिन घर के बाहर यम का दीपक जलाने की परंपरा है। नरक चतुर्दशी की रात जब घर के सभी सदस्य आ जाते हैं तो गृह स्वामी यम के नाम का दीपक जलाता है।
स्वच्छता का संदेश -
नरक चतुर्दशी स्वच्छता का संदेश देती है। जिस घर में स्वच्छता नहीं, वहां लक्ष्मी जी अपनी बहन अलक्ष्मी के साथ प्रवेश करती है। जहां स्वच्छता होती है, वहां वह स्वयं प्रवेश करती हैं। यह स्वच्छता केवल बाहरी नहीं, तन-मन की पवित्रता से भी है।
क्यों जलाते हैं यम का दीया-
सभी प्रकार के नरक से मुक्ति देने का कार्य यम ही करते हैं। इसलिए, नरक चतुर्दशी की रात को यम के नाम का दीपक जलाया जाता है। एक दीपक कूड़े के ढेर पर भी रखा जाता है। भाव यह है कि हम गंदगी को अपने से दूर कर रहे हैं।
क्या है महत्व -
देवी लक्ष्मी धन की प्रतीक हैं। धन का अर्थ केवल पैसा नहीं होता है। तन-मन की स्वच्छता और स्वस्थता भी धन का ही कारक हैं। नरक चतुर्दशी के दिन घर के नरक यानी गंदगी को दूर किया जाता है। धन के नौ प्रकार बताए गए हैं।
यह अवश्य करें
इस दिन जहां घर की सफाई की जाती है वहीं घर से हर प्रकार का टूटा-फूटा सामान भी फैंक देना चाहिए। घर में रखे खाली पेंट के डिब्बे, रद्दी, टूटे-फूटे कांच या धातु के बर्तन, किसी प्रकार का टूटा हुआ सजावटी सामान, बेकार पड़ा फर्नीचर व अन्य प्रयोग में न आने वाली वस्तुओं को यमराज का नरक माना जाता है इसलिए ऐसी बेकार वस्तुओं को घर से हटा देना चाहिए।

इस दिन सायं 4 बत्ती वाला मिट्टी का दीपक पूर्व दिशा में अपना मुख करके घर के मुख्य द्वार पर रखें और

‘दत्तो दीप: चतुर्दश्यो नरक प्रीतये मया। चतुर्वर्ति समायुक्त: सर्व पापा न्विमुक्तये।।’

मंत्र का जाप करें और नए पीले रंग के वस्त्र पहन कर यम का पूजन करें। जो व्यक्ति इन बातों पर अमल करता है उसे नर्क की यातनाओं और अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता। 
पूजा विधि
इस दिन शरीर पर तिल के तेल की मालिश करके सूर्योदय से पहले स्नान करने का विधान है। स्नान के दौरान अपामार्ग (एक प्रकार का पौधा) को शरीर पर स्पर्श करना चाहिए। अपामार्ग को निम्न मंत्र पढ़कर मस्तक पर घुमाना चाहिए-
सितालोष्ठसमायुक्तं सकण्टकदलान्वितम्।
हर पापमपामार्ग भ्राम्यमाण: पुन: पुन:।।
नहाने के बाद साफ कपड़े पहनकर, तिलक लगाकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके निम्न मंत्रों से प्रत्येक नाम से तिलयुक्त तीन-तीन जलांजलि देनी चाहिए। यह यम-तर्पण कहलाता है। इससे वर्ष भर के पाप नष्ट हो जाते हैं-
ऊं यमाय नम:, ऊं धर्मराजाय नम:, ऊं मृत्यवे नम:, ऊं अन्तकाय नम:, ऊं वैवस्वताय नम:, ऊं कालाय नम:, ऊं सर्वभूतक्षयाय नम:, ऊं औदुम्बराय नम:, ऊं दध्राय नम:, ऊं नीलाय नम:, ऊं परमेष्ठिने नम:, ऊं वृकोदराय नम:, ऊं चित्राय नम:, ऊं चित्रगुप्ताय नम:।
इस प्रकार तर्पण कर्म सभी पुरुषों को करना चाहिए, चाहे उनके माता-पिता गुजर चुके हों या जीवित हों। फिर देवताओं का पूजन करके शाम के समय यमराज को दीपदान करने का विधान है। नरक चतुर्दशी पर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा भी करनी चाहिए, क्योंकि इसी दिन उन्होंने नरकासुर का वध किया था। इस दिन जो भी व्यक्ति विधिपूर्वक भगवान श्रीकृष्ण का पूजन करता है, उसके मन के सारे पाप दूर हो जाते हैं और अंत में उसे वैकुंठ में स्थान मिलता है।
 प्राचीन कथा
जब भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर दैत्यराज बलि से तीन पग धरती मांगकर तीनों लोकों को नाप लिया तो राजा बलि ने उनसे प्रार्थना की- 'हे प्रभु! मैं आपसे एक वरदान मांगना चाहता हूं। यदि आप मुझसे प्रसन्न हैं तो वर देकर मुझे कृतार्थ कीजिए। तब भगवान वामन ने पूछा- क्या वरदान मांगना चाहते हो, राजन? दैत्यराज बलि बोले- प्रभु! आपने कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी से लेकर अमावस्या की अवधि में मेरी संपूर्ण पृथ्वी नाप ली है, इसलिए जो व्यक्ति मेरे राज्य में चतुर्दशी के दिन यमराज के लिए दीपदान करे, उसे यम यातना नहीं होनी चाहिए और जो व्यक्ति इन तीन दिनों में दीपावली का पर्व मनाए, उनके घर को लक्ष्मीजी कभी न छोड़ें।
राजा बलि की प्रार्थना सुनकर भगवान वामन बोले- राजन! मेरा वरदान है कि जो चतुर्दशी के दिन नरक के स्वामी यमराज को दीपदान करेंगे, उनके पितर कभी नरक में नहीं रहेंगे और जो व्यक्ति इन तीन दिनों में दीपावली का उत्सव मनाएंगे, उन्हें छोड़कर मेरी प्रिय लक्ष्मी अन्यत्र न जाएंगी। भगवान वामन द्वारा राजा बलि को दिए इस वरदान के बाद से ही नरक चतुर्दशी के दिन यमराज के निमित्त व्रत, पूजन और दीपदान का प्रचलन आरंभ हुआ, जो आज तक चला आ रहा है।
श्रीकृष्ण ने वध किया था नरकासुर का
नरक चतुर्दशी का पर्व मनाने के पीछे कई पौराणिक कथाएं हैं, इन्हीं में से एक कथा नरकासुर वध की भी है. कथा के मुताबिक प्रागज्योतिषपुर नगर का राजा नरकासुर नामक दैत्य था। उसने अपनी शक्ति से इंद्र, वरुण, अग्नि, वायु आदि सभी देवताओं को परेशान कर दिया। वह संतों को भी त्रास देने लगा। महिलाओं पर अत्याचार करने लगा। जब उसका अत्याचार बहुत बढ़ गया तो देवता व ऋषिमुनि भगवान श्रीकृष्ण की शरण में गए। भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें नरकासुर से मुक्ति दिलाने का आश्वासन दिया, लेकिन नरकासुर को स्त्री के हाथों मरने का श्राप था।
इसलिए भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा को सारथी बनाया तथा उन्हीं की सहायता से नरकासुर का वध किया। इस प्रकार श्रीकृष्ण ने कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को नरकासुर का वध कर देवताओं व संतों को उसके आतंक से मुक्ति दिलाई। उसी की खुशी में दूसरे दिन अर्थात कार्तिक मास की अमावस्या को लोगों ने अपने घरों में दीएं जलाए। तभी से नरक चतुर्दशी तथा दीपावली का त्योहार मनाया जाने लगा।
महत्व
रूप चौदस पर व्रत रखने का भी अपना महत्व है। मान्यता है कि रूप चौदस पर व्रत रखने से भगवान श्रीकृष्ण व्यक्ति को सौंदर्य प्रदान करते हैं। रूप चतुदर्शी के दिन सूर्योदय से पहले उठकर तिल के तेल की मालिश और पानी में चिरचिरी के पत्ते डालकर नहाना चाहिए। इसके बाद भगवान विष्णु और भगवान कृष्ण के दर्शन करने चाहिएऐसा करने से पापों का नाश होता है और सौंदर्य हासिल होता है।
साथ ही रूप चौदस की रात मान्यतानुसार घर का सबसे बुजुर्ग पूरे घर में एक दिया जलाकर घुमाता है और फिर उसे घर से बाहर कहीं दूर जाकर रख देता है। इस दिए को यम दीया कहा जाता है।इस दौरान घर के बाकी सदस्य अपने घर में ही रहते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस दिए को पूरे घर में घुमाकर बाहर ले जाने से सभी बुरी शक्तियां घर से बाहर चली जाती है।
नहाने से पहले मसाज करें
दक्षिण भारत में यह परंपरा है कि लोग आज के दिन सुबह जल्दी उठकर तेल से पूरे शरीर की मालिश करते हैं. अगर आप पुराने रिवाजों को न भी मानते हों तो भी आप ये काम तो आज कर ही सकते हैं. वैसे भी घर की दिवाली सफाई के बाद आपके शरीर को फिलहाल मसाज की सबसे ज्यादा ज़रूरत है।
उबटन लगाएं
कहा जाता है कि श्री कृष्ण के शरीर पर लगा नरकासुर का खून साफ करने के लिए उन्हें उबटन लगाया गया था. तब से इस दिन उबटन लगाने की परंपरा चली आ रही है। वैसे भी त्योहारों पर सजना संवरना हर कोई चाहता है. ।  
मिठाई, स्नैक्स बनाएं
जो मेन्यू आपने कल के लिए तय कर रखा है, उसके कुछ आइटम्स जैसे, मिठाई या स्नैक्स आज ही बना लें. वैसे भी 'दिवाली स्पेशल' खाने की लिस्ट काफी लंबी होती है. इसलिए अगर आप एक-दो चीज़ें आज ही तैयार कर लेंगे तो कल वर्कलोड थोड़ा कम होगा।
घर की सजावट करें
घर की साफ सफाई और धनतेरस शॉपिंग के बाद अब वक्त है सजावट का. तो नए पर्दे और बेडशीट्स निकालें और घर को फर्निश करें. घर को लाइट्स और खूबसूरत कैंडल्स से सजाएं. अगर कुछ ट्रेडिश्नल करना हो तो आज के दिन भी दीये जलाने और रंगोली बनाने का रिवाज़ है।
दोस्तों, रिश्तेदारों से मिलने जाएं
फोन पर त्योहार की शुभकामनाएं देने से ज्यादा बढ़िया होता है किसी को खुद जाकर बधाई और तोहफे देना. इसलिए आपके जो यार-रिश्तेदार दूर रहते हैं उनसे आज मिलने जाएं। वैसे भी दिवाली की पूजा और पकवान के बीच दूर दराज के लोगों संग मुलाकात अमूमन संभव नहीं हो पाती है
यम-तर्पण
नहाने के बाद साफ कपड़े पहनकर, तिलक लगाकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके निम्न मंत्रों से प्रत्येक नाम से तिलयुक्त तीन-तीन जलांजलि देनी चाहिए। यह यम-तर्पण कहलाता है। इससे वर्ष भर के पाप नष्ट हो जाते हैं-
इस प्रकार तर्पण कर्म सभी पुरुषों को करना चाहिए, चाहे उनके माता पिता गुजर चुके हों या जीवित हों। फिर देवताओं का पूजन करके शाम के समय यमराज को दीपदान करने का विधान है। नरक चतुर्दशी पर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा भी करनी चाहिए, क्योंकि इसी दिन उन्होंने नरकासुर का वध किया था। इस दिन जो भी व्यक्ति विधिपूर्वक भगवान श्रीकृष्ण का पूजन करता है, उसके मन के सारे पाप दूर हो जाते हैं और अंत में उसे वैकुंठ में स्थान मिलता है।


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