पति की लंबी उम्र के लिए महिलाएँ करेगी करवाचौथ...!!
पति की लंबी उम्र
के लिए महिलाएँ करेगी
करवाचौथ...!!
अनीष व्यास
स्वतंत्र
पत्रकार
करवाचौथ सुहागिन महिलाओं के
सभी व्रतों में
बेहद खास है
। इस दिन
महिलाएं दिन भर
भूखी-प्यासी
रहकर अपने पति
की लंबी उम्र
की कामना करती
हैं। यही नहीं
कुंवारी लड़कियां भी मनवांछित
वर के लिए
या होने वाले
पति की खातिर
निर्जला व्रत रखती
हैं। इस दिन
पूरे विधि-विधान
से माता पार्वती
और भगवान गणेश
की पूजा-अर्चना
करने के बाद
करवा चौथ की
कथा सुनी जाती
है। फिर रात
के समय चंद्रमा
को अर्घ्य
देने के बाद
ही यह व्रत
संपन्न होता
है। मान्यता
है कि करवा
चौथ का व्रत
करने से अखंड
सौभाग्य का
वरदान मिलता है।
यह त्योहार राजस्थान, उत्तर
प्रदेश, मध्य प्रदेश
और पंजाब में
बहुत धूमधाम से
मनाया जाता है।
इस दिन महिलाएं
सज संवरकर चंद्रमा
की पूजा करती
हैं। करवा चौथ
के दिन सोलह
श्रृंगार का विशेष
महत्व होता है।
हिंदू पंचांग के अनुसार
करवाचौथ का व्रत
कार्तिक मास के
कृष्ण पक्ष की
चतुर्थी को रखा
जाता है। इस
वर्ष करवाचौथ का
व्रत 17 अक्टूबर को है। ये व्रत
सुहागिन औरतें अपने पति
की लंबी आयु
की कामना के
लिए रखती हैं।
खास बात यह
है कि करवाचौथ
पर इस बार
करीब 70 वर्ष बाद
बेहद शुभ संयोग
बन रहा है।
रोहिणी नक्षत्र के साथ
मंगल का योग
होने के कारण
करवाचौथ को अधिक
मंगलकारी बना रहा
है।
ज्योतिषाचार्य
मनीष व्यास ने
बताया कि करवाचौथ
पर रोहिणी नक्षत्र
और चंद्रमा में
रोहिणी का योग
होने से मार्कण्डेय
और सत्यभामा योग
बन रहा है।
यह योग चंद्रमा
की 27 पत्नियों में
सबसे प्रिय पत्नी
रोहिणी के साथ
होने से बन
रहा है। पति
के लिए व्रत
रखने वाली सुहागिनों
के लिए यह
बेहद फलदायी होगा।
ऐसा योग भगवान
श्रीकृष्ण और सत्यभामा
के मिलन के
समय भी बना
था।
ज्योतिषाचार्य
मनीष व्यास ने
बताया कि करवा
चौथ की पूजा
से पहले और
बाद में भजन-कीर्तन जरूर करें।
इससे वातावरण में
सकारात्मकता आती है
और पूजन का
पूर्ण फल मिलता
है।
इस बार करवा
चौथ 17 अक्टूबर को है।
कहा जाता है
कि इस दिन
महिलाओं को सोलह
श्रृंगार करके ही
पूजा में शामिल
होना चाहिए। इनमें
मेंहदी, चूड़िया, मांग टीका
के अलावा और
भी चीजों को
सोलह श्रृंगार में
शामिल किया है।
करवा चौथ' का
त्यौहार हिन्दुओं का प्रसिद्द
त्यौहार है। यह
हिन्दू कैलेण्डर के अनुसार
कार्तिक माह के
कृष्ण पक्ष की
चतुर्थी को मनाया
जाता है। इस
दिन को 'गणेश
चतुर्थी' भी कहते
हैं।
मान्यता है कि
अपने प्रिय पुत्र
श्री गणेश को
विशेष दर्जा दिलाने
के लिए मां
पार्वती ने शिव
से प्रार्थना की
थी। भगवान् शिव
ने मां पार्वती
की प्रार्थना स्वीकार
कर श्री गणेश
को गणों में
सबसे पहले पूजा
करने का वरदान
दिया था। तब
से शुभ कार्य
होने से पहले
श्री गणेश का
पूजन किया जाता
है। गणेश चतुर्थी
के दिन ही
करवा चौथ का
व्रत पड़ता है।
करवा चौथ के
चलते बाज़ारों में
महिलाओं की खासी
भीड़ दिखाई पड़ती
है। महिलायें नए
कपड़ों को खरीदने
साथ ही डिज़ाईनर
करवे भी खरीदती
हैं।
ग्रामीण स्त्रियों से लेकर
आधुनिक महिलाओं तक सभी
नारियाँ करवाचौथ का व्रत
बडी़ श्रद्धा एवं
उत्साह के साथ
रखती हैं। शास्त्रों
के अनुसार यह
व्रत कार्तिक मास
के कृष्णपक्ष की
चन्द्रोदय व्यापिनी चतुर्थी के
दिन करना चाहिए।
पति की दीर्घायु
एवं अखण्ड सौभाग्य
की प्राप्ति के
लिए इस दिन
भालचन्द्र गणेश जी
की अर्चना की
जाती है।
यह व्रत 12 वर्ष तक
अथवा 16 वर्ष तक
लगातार हर वर्ष
किया जाता है।
अवधि पूरी होने
के पश्चात इस
व्रत का उद्यापन
(उपसंहार) किया जाता
है। जो सुहागिन
स्त्रियाँ आजीवन रखना चाहें
वे जीवनभर इस
व्रत को कर
सकती हैं। इस
व्रत के समान
सौभाग्यदायक व्रत अन्य
कोई दूसरा नहीं
है। अतः सुहागिन
स्त्रियाँ अपने सुहाग
की रक्षार्थ इस
व्रत का सतत
पालन करें।
भारत देश में
वैसे तो चौथ
माता जी के
मंदिर कई जगह
है। लेकिन सबसे
प्राचीन एवं सबसे
अधिक ख्याति प्राप्त
मंदिर राजस्थान राज्य
के सवाई माधोपुर
जिले के चौथ
का बरवाड़ा गाँव
में स्थित है।
चौथ माता के
नाम पर इस
गाँव का नाम
बरवाड़ा से चौथ
का बरवाड़ा पड़
गया। चौथ माता
मंदिर की स्थापना
महाराजा भीमसिंह चौहान ने
की थी।
खास योग
ज्योतिषाचार्य मनीष व्यास कहते हैं कि करीब 35 सालों बाद इस करवा चौथ पर पांच योग का मिलन हो रहा है। सर्वार्थामृत, सिद्धियोग, मार्कण्डेय, सत्यभामा और मंगल योग का मिलन हो रहा है। करवा चौथ पर रोहिणी नक्षत्र का भी संयोग होना अद्भूत योग बना रहा है। चन्द्रमा की 27 पत्नियों में एक पत्नी सबसे प्रिय पत्नी रोहिणी को माना जाता है। वे बताते हैं कि ऐसा संयोग भगवान श्रीकृष्ण और सत्यभामा के मिलने के समय भी बना था।
ज्योतिषाचार्य मनीष व्यास कहते हैं कि करीब 35 सालों बाद इस करवा चौथ पर पांच योग का मिलन हो रहा है। सर्वार्थामृत, सिद्धियोग, मार्कण्डेय, सत्यभामा और मंगल योग का मिलन हो रहा है। करवा चौथ पर रोहिणी नक्षत्र का भी संयोग होना अद्भूत योग बना रहा है। चन्द्रमा की 27 पत्नियों में एक पत्नी सबसे प्रिय पत्नी रोहिणी को माना जाता है। वे बताते हैं कि ऐसा संयोग भगवान श्रीकृष्ण और सत्यभामा के मिलने के समय भी बना था।
शुभ मुहूर्त में करें अर्घ्य
दान
करवा चौथ की प्रात:काल सूर्य की उपासना एवं संध्या चन्द्रमा की उपासना करने का विधान है। रविवार को तृतीय तिथि रात्रि 7.59 तक है। उसके बाद चतुर्थी तिथि का प्रारंभ हो रहा है। चन्द्रमा का उदय रात 7.38 बजे है। इसलिए व्रतियों को अर्घ्य अर्पण 8 से आरंभ करना चाहिए। पंचोपकार विधि से पूजा श्रेष्ठकर होगा।
करवा चौथ की प्रात:काल सूर्य की उपासना एवं संध्या चन्द्रमा की उपासना करने का विधान है। रविवार को तृतीय तिथि रात्रि 7.59 तक है। उसके बाद चतुर्थी तिथि का प्रारंभ हो रहा है। चन्द्रमा का उदय रात 7.38 बजे है। इसलिए व्रतियों को अर्घ्य अर्पण 8 से आरंभ करना चाहिए। पंचोपकार विधि से पूजा श्रेष्ठकर होगा।
लाल रंग के कपड़े
पहनें, मिलेगा पति का प्यार
करवाचौथ के दिन
व्रत रखने वाली
महिलाएं यदि लाल
रंग के कपड़े
पहनती हैं तो उन्हें जिंदगी भर
पति का प्यार
मिलेगा। माना जाता
है कि लाल
रंग गर्मजोशी का
प्रतीक है और
मनोबल भी बढ़ाता
है। साथ ही
लाल रंग प्यार
का प्रतीक भी
माना जाता है।
लाल रंग में
महिलाएं अधिक सुंदर
और आकर्षित दिखती
हैं एवं सबके
आकर्षण का केंद्र
बिंदू बनती हैं।
नीले, भूरे और
काले रंग के
कपड़े न पहनें,
क्योंकि ये अशुभता
के प्रतीक हैं।
कैसे मनाते हैं करवा चौथ
का त्योहार
करवा चौथ की
तैयारियां कई दिन
पहले से शुरू
हो जाती हैं.
सुहागिन महिलाएं कपड़े, गहने,
श्रृगार का सामान
और पूजा सामग्री
खरीदती हैं. करवा
चौथ वाले दिन
महिलाएं सूर्योदय से पहले
सरगी खाती हैं.
इसके बाद सुबह
हाथ और पैरों
पर मेहंदी लगाई
जाती है और
पूजा की थालियों
को सजाया जाता
है. व्रत करने
वाली आस-पड़ोस
की महिलाएं शाम
ढलने से पहले
किसी मंदिर, घर
या बगीचे में
इकट्ठा होती हैं.
यहां सभी महिलाएं
एक साथ करवा
चौथ की पूजा
करती हैं. इस
दौरान गोबर और
पीली मिट्टी से
पार्वती जी की
प्रतिमा स्थापित
की जाती है.
आज कल माता
गौरी की पहले
से तैयार प्रतिमा
को भी रख
दिया जाता है.
विधि-विधान से
पूजा करने के
बाद सभी महिलाएं
किसी बुजुर्ग महिला
से करवा चौथ
की कथा सुनती
हैं. इस दौरान
सभी महिलाएं लाल
जोड़े में पूरे
सोलह श्रृंगार के
साथ पूजा करती
हैं. चंद्रमा के
उदय पर अर्घ्य दिया
जाता है और
पति की आरती
उतारी जाती है.
पति के हाथों
पानी पीकर महिलाओं
के उपवास का
समापन हो जाता
है।
करवा चौथ की पूजन
सामग्री
करवा चौथ के
व्रत से एक-दो दिन
पहले ही सारी
पूजन सामग्री को
इकट्ठा करके घर
के मंदिर में
रख दें. पूजन
सामग्री इस प्रकार
है- मिट्टी का
टोंटीदार करवा व
ढक्कन, पानी
का लोटा, गंगाजल,
दीपक, रूई, अगरबत्ती,
चंदन, कुमकुम, रोली,
अक्षत, फूल, कच्चा दूध,
दही, देसी घी,
शहद, चीनी, हल्दी, चावल,
मिठाई, चीनी का
बूरा, मेहंदी, महावर,
सिंदूर, कंघा, बिंदी, चुनरी,
चूड़ी, बिछुआ, गौरी बनाने
के लिए पीली
मिट्टी, लकड़ी का आसन,
छलनी, आठ पूरियों
की अठावरी, हलुआ
और दक्षिणा के
पैसे।
पूजा विधि
करवा चौथ वाले
दिन ब्रह्म मुहूर्त
में उठकर स्नान कर
लें।
अब इस मंत्र
का उच्चारण
करते हुए व्रत
का संकल्प
लें- ''मम सुखसौभाग्य
पुत्रपौत्रादि सुस्थिर श्री प्राप्तये
करक चतुर्थी व्रतमहं
करिष्ये''.
सूर्यादय से पहले
सरगी ग्रहण करें
और फिर दिन
भर निर्जला व्रत
रखें। दीवार पर
गेरू से फलक
बनाएं और भिगे हुए
चावलों को पीसकर
घोल तैयार कर
लें। इस घोल
से फलक पर
करवा का चित्र
बनाएं। वैसे बाजार
में आजकर रेडीमेड
फोटो भी मिल
जाती हैं। इन्हें वर
कहा जाता है.
चित्रित करने की
कला को करवा
धरना का जाता
है। आठ पूरियों
की अठावरी बनाएं.
मीठे में हल्वा या
खीर बनाएं और
पकवान भी तैयार
करें। अब पीली
मिट्टी और गोबर
की मदद से
माता पार्वती की
प्रतिमा बनाएं. अब इस
प्रतिमा को लकड़ी
के आसान पर
बिठाकर मेहंदी, महावर, सिंदूर,
कंघा, बिंदी, चुनरी,
चूड़ी और बिछुआ
अर्पित करें। जल से
भर हुआ लोट
रखें। करवा में
गेहूं और ढक्कन में
शक्कर का
बूरा भर दें।
रोली से करवा
पर स्वास्तिक
बनाएं। अब गौरी-गणेश और
चित्रित करवा की
पूजा करें।
पति की लंबी
उम्र की प्रार्थना
करते हुए इस
मंत्र का उच्चारण करें-
''ऊॅ नम: शिवायै
शर्वाण्यै सौभाग्यं संतति शुभाम।
प्रयच्छ भक्तियुक्तानां नारीणां हरवल्लभे॥''
करवा पर 13 बिंदी रखें
और गेहूं या
चावल के 13 दाने
हाथ में लेकर
करवा चौथ की
कथा कहें या
सुनें। कथा सुनने
के बाद करवा
पर हाथ घुमाकर
अपने सभी बड़ों
का आशीर्वाद लें
और करवा उन्हें
दे दें। पानी
का लोटा और
13 दाने गेहूं के अलग
रख लें।चंद्रमा के
निकलने के बाद
छलनी की ओट
से पति को
देखें और चन्द्रमा
को अर्घ्य
दें। चंद्रमा को
अर्घ्य देते
वक्त पति
की लंबी उम्र
और जिंदगी भर
आपका साथ बना
रहे इसकी कामना
करें। अब पति
को प्रणाम कर
उनसे आशीर्वाद लें
और उनके हाथ
से जल पीएं.
अब पति के
साथ बैठकर भोजन
करें।
सरगी
करवा चौथ के
दिन सरगी का
भी विशेष महत्व है। इस दिन
व्रत करने वाली
महिलाएं और लड़कियां
सूर्योदय से पहले
उठकर स्नान
करने के बाद
सरगी खाती हैं। सरगी आमतौर
पर सास तैयार
करती है। सरगी
में सूखे मेवे,
नारियल, फल और
मिठाई खाई जाती
है। अगर सास
नहीं है तो
घर का कोई
बड़ा भी अपनी
बहू के लिए
सरगी बना सकता
है। जो लड़कियां
शादी से पहले
करवा चौथ का
व्रत रख रही
हैं। उसके ससुराल
वाले एक शाम
पहले उसे सरगी
दे आते हैं। सरगी सुबह
सूरज उगने से
पहले खाई जाती
है ताकि दिन
भर ऊर्जा बनी
रहे।
करवा चौथ मुहूर्त
करवा चौथ पूजा मुहूर्त:
सायंकाल
6:35 से रात 8 बजे तक
अर्घ्य 8 बजे के
बाद
करवा चौथ चंद्रोदय का
समय
सायंकाल
7:38 के बाद
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