रावण दहन के साथ करे सामाजिक बुराइयों का अंत

विजया दशमी आज 
रावण दहन के साथ करे सामाजिक बुराइयों का अंत
अनीष व्यास 
स्वतंत्र पत्रकार
बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है दशहरा। नौ दिन मां दुर्गा को समर्पित करने के बाद दशमी के दिन बुराई पर जीत के रूप में विजयदशमी मनाई जाती है। इस दिन श्रीराम ने लंका के राजा रावण का वध करके अन्याय पर न्याय की स्थापना की थी। इसके अलावा इस दिन मां दुर्गा ने महिषासुर का संहार भी किया था इसलिए भी इसे विजयदशमी के रुप में मनाया जाता है।
दशहरे का महत्व  
दशहरा संस्कृत के दो शब्दों से मिलकर बना है। दश यानी बुराई और हरा यानी खत्म करना। इस तरह दशहरे का अर्थ हुआ बुराई का नाश करके अच्छाई की पुर्नस्थापना करना। विजयदशमी वर्ष के श्रेष्ठ मुहूर्त बसंत पंचमी और अक्षय तृतीया की तरह ही शुभ माना गया है। विजयदशमी के दिन कोई भी अनुबंध हस्ताक्षर करना हो गृह प्रवेश करना हो नया व्यापार आरंभ उतरना हो या किसी भी तरह का लेनदेन का कार्य करना हो तो उसके लिए श्रेष्ठ फलदाई माना गया है। दशहरे का पर्व साल के सबसे पवित्र और शुभ दिनों में से एक माना गया है। यह तीन मुहूर्त में से एक है, साल का सबसे शुभ मुहूर्त - चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, अश्विन शुक्ल दशमी, वैशाख शुक्ल तृतीया। यह अवधि किसी भी चीज की शुरूआत करने के लिए उत्तम है। 
दशहरा बौद्ध धर्म के लिए भी बहुत महत्व रखता है। कहा जाता है इसी दिन से मौर्य शासन की शुरुआत हुई थी और अशोक ने अंहिसा को त्याग बौद्ध धर्म अपना लिया था। 
आज सत्य पर असत्य की जीत का सबसे बड़ा त्योहार दशहरा मनाया जा रहा है। विजयदशमी का त्योहार पूरे देश में बहुत धूमधाम के साथ मनाया जाता है आज के दिन अस्त्र-शस्त्र का पूजन और रावण दहन के बाद बड़ो के पैर छूकर आशीर्वाद लेने की परंपरा सदियों से चली आ रही है
बुराई पर अच्‍छाई का प्रतीक माने जाने वाला दशहरा आज मनाया जा रहा है। इस दिन माना जाता है कि अगर आपको नीलकंठ पक्षी के दर्शन हो जाए तो आपके सारे बिगड़े काम बन जाते हैं। नीलकंठ पक्षी को भगवान का प्रतिनिधि माना गया है। 
दशहरे पर नीलकंठ पक्षी के दर्शन होने से पैसों और संपत्ति में बढ़ोतरी होती है। मान्यता है कि यदि दशहरे के दिन किसी भी समय नीलकंठ दिख जाए तो इससे घर में खुशहाली आती है और वहीं, जो काम करने जा रहे हैं, उसमें सफलता मिलती है।
नीलकंठ का दिखना क्यों शुभ है?
जब श्रीराम रावण का वध करने जा रहे थे। उसी दौरान उन्हें नीलकंठ के दर्शन हुए थे। इसके बाद श्रीराम को रावण पर विजय मिली थी।  यही वजह है कि नीलकंठ का दिखना शुभ माना गया है।
इस दिन सभी अपने शस्त्रों का पूजन करते है। सबसे पहले शस्त्रों के ऊपर जल छिड़क कर पवित्र किया जाता है फिर महाकाली स्तोत्र का पाठ कर शस्त्रों पर कुंकुम, हल्दी का तिलक लगाकर हार पुष्पों से श्रृंगार कर धूप-दीप कर मीठा भोग लगाया जाता है। शाम को रावण के पुतले का दहन कर विजया दशमी का पर्व मनाया जाता है।
इसी तरह की कई और बातें हैं जो  दशहरा के दिन की जाती है। इनमें से एक है, आज के दिन पान का बीड़ा हनुमानजी के चढ़ाना और उसके बाद इसे खाना। पान हनुमाजी को बहुत पसंद है और इस बार दशहरा मंगलवार को पड़ रहा है इसलिए यह दिन और भी खास हो जाता है
पान देता है आरोग्य
विजयादशमी पर पान खाने, खिलाने तथा हनुमानजी पर पान अर्पित करके उनका आशीर्वाद लेने का महत्त्व है। पान मान-सम्मान, प्रेम एवं विजय का सूचक माना जाता है। इसलिए विजयादशमी के दिन रावण, कुम्भकर्ण और मेघनाद दहन के पश्चात पान का बीणा खाना सत्य की जीत की ख़ुशी को व्यक्त करता है। वहीं शारदीय नवरात्रि के बाद मौसम में बदलाव के कारण संक्रामक रोग फैलने का खतरा बढ़ जाता है इसलिए स्वास्थ्य की दृष्टि से भी पान का सेवन पाचन क्रिया को मज़बूत कर संक्रामक रोगों से बचाता है।
शुभ दिन है मांगलिक कार्यों के लिए
विजयादशमी सर्वसिद्धिदायक है इसलिए इस दिन सभी प्रकार के मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं। मान्यता है कि इस दिन जो कार्य शुरू किया जाता है उसमें सफलता अवश्य मिलती है। यही वजह है कि प्राचीन काल में राजा इसी दिन विजय की कामना से रण यात्रा के लिए प्रस्थान करते थे। इस दिन जगह-जगह मेले लगते हैं, रामलीला का आयोजन होता है और रावण का विशाल पुतला बनाकर उसे जलाया जाता है। इस दिन बच्चों का अक्षर लेखन, दुकान या घर का निर्माण, गृह प्रवेश, मुंडन, अन्न प्राशन, नामकरण, कारण छेदन, यज्ञोपवीत संस्कार आदि शुभ कार्य किए जा सकते हैं। परन्तु विजयादशमी के दिन विवाह संस्कार निषेध माना गया है ।क्षत्रिय अस्त्र-शास्त्र का पूजन भी विजयादशमी के दिन ही करते हैं ।
रावण सिर्फ एक व्यक्ति नहीं, बल्कि तमाम बुराइयों का प्रतीक है, जिसका हर दशहरे पर वध किया जाता है। आज के दौर में हमारे समाज में तमाम बुराइयां हैं जिनका वध बहुत जरूरी है। एक नजर कलयुग के 10 रावणों पर :
बलात्कार 
देश में हर रोज बलात्कार की 106 घटनाएं होती हैं, जिनमें हर चौथी पीड़िता नाबालिग बालिका होती है। ये डराने वाले आंकड़े बताते हैं कि हम इनसान से शैतान होते जा रहे हैं। कलियुग में इस बुराई रूपी रावण का वध करने के लिए हमें ही पहल करनी होगी।.
गंदगी
स्वच्छता को लेकर व्यापक स्तर पर अभियान चलाने के बावजूद गंदगी से हमारा पीछा नहीं छूट रहा है। इसके लिए जिम्मेदार भी हम ही हैं। देश में हर रोज एक लाख मीट्रिक टन कचरा निकलता है। इसके प्रबंधन की समुचित व्यवस्था नहीं है।.
भ्रष्टाचार
भ्रष्टाचार के मुद्दे पर हम नेताओं को बुरा-भला कहते रहते हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल 45 फीसदी भारतीयों ने अपना काम निकलवाने के लिए रिश्वत का सहारा लिया।.
प्रदूषण
दुनिया के 20 सबसे प्रदूषित शहरों में से 14 भारत में हैं। प्रदूषक कण पीएम 2.5 का स्तर तेजी से बढ़ रहा है। इस दशहरे हमें इस रावण को हर हाल में खत्म करना होगा।.
अशिक्षा
अगर समाज शिक्षित नहीं होगा तो उसका विकास भी नहीं होगा। वर्तमान में भारत में 25 फीसदी लोग शिक्षा के अधिकार से वंचित हैं। आने वाली पीढ़ी को शिक्षित करके ही बेहतर समाज की नींव रखी जा सकती है।.
गरीबी
गरीबी रूपी अभिशाप से पीछा छुड़ाना आसान नहीं है। भारत की 30 फीसदी आबादी गरीबी रेखा के नीचे जिंदगी बसर करने को मजबूर है। हम इस रावण को रोजगार रूपी हथियार से ही खत्म कर पाएंगे। 
अंधविश्वास : आज भी जादू-टोने पर विश्वास
हम भले ही 21वीं सदी में पहुंच गए हैं, लेकिन अंधविश्वास रूपी रावण का अंत नहीं हो पाया है। हाल ही में 14 बाबा ब्लैकलिस्ट हो चुके हैं। फिर भी लोगों का जादू-टोने की शरण में जाना बंद नहीं हुआ है।


सभी लोग ये मानते हैं कि रावण श्रीराम के अलावा कभी किसी से नहीं हारा।लेकिन बहुत कम लोग ये जानते हैं रावण श्रीराम के अलावा भी अन्य 4 शक्तिशाली योद्धाओं से हारा था। 
सहस्त्रबाहु अर्जुन से भी हारा रावण
वाल्मीकि रामायण के अनुसारजब राक्षसराज रावण ने सभी राजाओं को जीत लियातब वह महिष्मती नगर (वर्तमान में महेश्वर) के राजा सहस्त्रबाहु अर्जुन को जीतने की इच्छा से उनके नगर गया। रावण ने सहस्त्रबाहु अर्जुन को युद्ध के लिए ललकारा। नर्मदा के तट पर ही रावण और सहस्त्रबाहु अर्जुन में भयंकर युद्ध हुआ। अंत में सहस्त्रबाहु अर्जुन ने रावण को बंदी बना लिया। जब यह बात रावण के पितामह (दादा) पुलस्त्य मुनि को पता चली तो वे सहस्त्रबाहु अर्जुन के पास आए और रावण को छोडऩे के लिए निवेदन किया। सहस्त्रबाहु अर्जुन ने रावण को छोड़ दिया और उससे मित्रता कर ली।
शिवजी से रावण की हार
रावण बहुत शक्तिशाली था और उसे अपनी शक्ति पर बहुत ही घमंड था। रावण इस घमंड के नशे में शिवजी को हराने के लिए कैलाश पर्वत पर पहुंच गया था। रावण ने शिवजी को युद्ध के लिए ललकारालेकिन महादेव तो ध्यान में लीन थे। रावण कैलाश पर्वत को उठाने लगा। तब शिवजी ने पैर के अंगूठे से ही कैलाश का भार बढ़ा दियाइस भार को रावण उठा नहीं सका और उसका हाथ पर्वत के नीचे दब गया। इस हार के बाद रावण ने शिवजी को अपना गुरु बनाया था।

राजा बलि के महल में रावण की हार
धर्म ग्रंथों के अनुसारपृथ्वी  स्वर्ग की जीतने के बाद रावण पाताल लोक को जीतना चाहता था। उस समय दैत्यराज बलि पाताल लोक के राजा थे। एक बार रावण राजा बलि से युद्ध करने के लिए पाताल लोक में उनके महल तक पहुंच गया था। वहां पहुंचकर रावण ने बलि को युद्ध के लिए ललकाराउस समय बलि के महल में खेल रहे बच्चों ने ही रावण को पकड़कर घोड़ों के साथ अस्तबल में बांध दिया था। इस प्रकार राजा बलि के महल में रावण की हार हुई।
जब बालि से हारा रावण
रावण परम शक्तिशाली थी।अन्य योद्धाओं को हरा कर वह स्वयं को सर्वशक्तिमान साबित करना चाहता था। जब रावण को पता चला कि वानरों का राजा बालि भी परम शक्तिशाली है तो वह उससे लड़ने किष्किंधा पहुंच गया। बालि उस समय पूजा कर रहा था। रावण ने बालि को युद्ध के लिए ललकारा तो बालि ने गुस्से में उसे अपनी बाजू में दबा लिया और समुद्रों की परिक्रमा करने लगा। रावण ने बालि के बाजू से निकलने की बहुत कोशिश कीलेकिन वह सफल नहीं हो पाया। पूजा के बाद जब बालि ने रावण को छोड़ तो वह निढाल हो चुका था। इसके बाद रावण को बालि को अपना मित्र बना लिया।


दशहरा का शुभ मुहूर्त
विजय मुहूर्त: अगर आपको किसी भी कार्य करके अपनी जीत सुनिश्चित करनी है तो 8 अक्टूबर दोपहर 01 बजकर 42 मिनट से लेकर 02 बजकर 29 मिनट तक कर सकते है।
अपराह्न पूजा समय- 13:17 से 15:36
दशमी तिथि आरंभ- दोपहर 12:39 (7 अक्तूबर)
दशमी तिथि समाप्त- 14:50 मिनट (8 अक्तूबर)


















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