कालसर्प दोष का प्रभाव...लक्षण और उपाय !!

कालसर्प दोष का प्रभाव...लक्षण और उपाय !!
काल सर्प दोष किसी व्यक्ति की कुंडली की एक अवस्था है जो अत्यधिक कठिनाई ला सकता है और असभ्य प्रभाव डाल सकता है। हिंदू ज्योतिष के अनुसार यदि किसी की कुंडली में, सूर्य, चंद्रमा, बुध, शुक्र, बृहस्पति, शनि और मंगल ग्रह के सभी प्रमुख ग्रहों को राहू और केतू के बीच रखा जाता है, तो काल सर्प योग बन जाता है और उस व्यक्ति को काल सर्प दोष से पीड़ित कहा जाता है। दूसरे शब्दों में, इस दोष में, राहू को सर्प का सिर माना जाता है और केतू सर्प की पूंछ होती है जिसके बीच सभी प्रमुख ग्रहों को रखा जाता है।
कुंडली में इस दोषपूर्ण पहलू की मौजूदगी बेहद हानिकारक साबित हो सकती है। जन्मपत्रिका में राहू और केतू की स्थिति के आधार पर किसी के जीवन के किसी भी क्षेत्र जैसे प्रेम, पैसा, कैरियर, परिवार, विवाह और व्यवसाय पर कुछ बहुत ही विनाशकारी प्रभाव पड़ सकते हैं। अधिक या कम, किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली का हर पहलू, जो इस दोष से प्रभावित है, को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करते हैं। यहां तक ​​कि अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में अच्छे और अनुकूल ग्रहों की स्थिति है, तो काल सर्प योग उनके सकारात्मक प्रभाव को खत्म कर देता है।
कुछ लोगों की जन्म कुंडली में आंशिक काल सर्प योग भी होता है। एक पूर्ण काल सर्प दोष तब होता है जब सभी सात ग्रह राहू और केतू की धुरी के एक तरफ होते हैं। भले ही एक ग्रह दूसरी तरफ हो, तो ऐसी ज्योतिषीय स्थिति को आंशिक काल सर्प योग के रूप में जाना जाता है। इसमें भी कुछ हानिकारक प्रभाव हैं, लेकिन पूर्ण कार्ल सर्प योग जितने तीव्र नहीं हैं।
कालसर्प दोष का नाम सुनकर ही लोग परेशान हो जाते हैं। लेकिन यदि आपकी कुंडली में कालसर्प दोष है तो उसे समझने की जरूरत हैं।परेशान होने की नहीं। छोटे-छोटे उपाय करके आप कालसर्प दोष से मुक्ति पा सकते हैं।
कालसर्प दोष के प्रकार
कालसर्प दोष कई प्रकार के होते हैं लेकिन 12 कालसर्पदोष मुख्य रूप से माने गए हैं।
अनंत, कुलिक, वासुकी, शंखपाल, पदम, महापदम, तक्षक, कारकोतक, शंखचूड़, घातक, विषधर और शेषनाग कालसर्प दोष
काल सर्प दोष के लक्षण
बाल्यकाल घटना-दुर्घटना, चोट लगना, बीमारी आदि, विद्या में रुकावट, विवाह में विलंब, वैवाहिक जीवन में तनाव, तलाक, संतान का न होना, धोखा खाना, लंबी बीमारी, आए दिन घटना-दुर्घटनाएं, रोजगार में दिक्कत, घर की महिलाओं पर संकट, गृहकलह, मांगलिक कार्यों में बाधा, गर्भपात, अकाल मृत्यु, प्रेतबाधा, दिमाग में चिड़चिड़ापन आदि।
कैसे जानें कालसर्प दोष का प्रभाव
कुंडली विश्ल़ेषण एवं ज्योतिष सहायता से ।

उपाय
प्रतिदिन शिवजी का जल से अभिषेक करें और बेलपत्र चढ़ाएं। शिवजी को विजया, अर्क पुष्प, धतूर पुष्प, फल चढ़ाएं तथा दूध से रुद्राभिषेक करवाएं। किसी ऐसे शिव मंदिर में, जहां शिवजी पर नाग नहीं हों, वहां प्रतिष्ठा करवाकर नाग चढ़ाएं। शिवलिंग पर चांदी का नाग अर्पित करें।
क्रीडी नगरा को सींचे या भोजन दे। मछलियों को आटा-दाना डाले।
प्राण प्रतिष्ठित कालसर्प यंत्र की स्थापना करें।
रविवार को भगवान भैरवनाथ के दर्शन करें।
सुबह और शाम को हनुमान चालीसा का पाठ करें।
मिट्टी या चांदी का नाग-नागिन का जोड़ा बनवाकर पूजन कर जल में बहाएं।
सपेरे से नाग या जोड़ा पैसे देकर जंगल में स्वतंत्र करें।
जप-हवन करें या करवाएं।
काल सर्प दोष निवारण के लिए और कुंडली विश्ल़ेषण एवं ज्योतिष सहायता के लिए संपर्क करें।
अनीष व्यास
ज्योतिषविद् एवं कुण्डली विश्ल़ेषक
9460872809
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